महाराष्ट्र में होने जा रहे महानगरपालिका चुनावों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह गर्मा दिया है। इस बार कुल 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान होना है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा और सियासी जोर मुंबई महानगरपालिका चुनाव पर देखने को मिल रहा है। देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई की सत्ता किसके हाथ में होगी, यह सवाल हर राजनीतिक दल के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। महायुति और ठाकरे बंधुओं के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, जहां दोनों ही खेमे पूरी ताकत झोंकने में लगे हैं। रैलियों, सभाओं और बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है और हर दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है। इसी सियासी माहौल के बीच शनिवार, 3 जनवरी 2026 को मुंबई में महायुति की एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंच से ऐसा बयान दे दिया, जिसने मुंबई के अगले मेयर को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। लंबे समय से यह सवाल उठाया जा रहा था कि अगर महायुति सत्ता में आती है तो मेयर किस समुदाय और किस पृष्ठभूमि से होगा। विपक्ष इस मुद्दे को हवा देने में लगा था, लेकिन देवेंद्र फडणवीस की घोषणा ने सियासी बहस को नई दिशा दे दी।
काम का श्रेय और रुकावटों पर देवेंद्र फडणवीस का हमला
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बिना नाम लिए ठाकरे गुट के नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही “श्रेय चुराने वाली टोली” सक्रिय हो जाती है, जो हर बड़े प्रोजेक्ट का श्रेय खुद लेने की कोशिश करती है। फडणवीस ने कोस्टल रोड, मेट्रो परियोजना और बीडीडी चॉल पुनर्विकास जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग दावा करते हैं कि ये सभी काम उन्होंने किए, जबकि हकीकत मुंबई की जनता अच्छी तरह जानती है।
देवेंद्र फडणवीस ने सवालिया लहजे में पूछा कि कोस्टल रोड किसने बनाया, मेट्रो का काम किस सरकार ने आगे बढ़ाया और मुंबई के विकास में किसने लगातार रुकावटें डालीं। फडणवीस ने कहा कि अगर आधी रात को भी किसी मुंबईकर से पूछा जाए तो जवाब साफ होगा कि विकास कार्य महायुति की सरकार ने किए हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान कई अहम परियोजनाओं पर स्थगन लगाए गए, जिससे मुंबई का विकास प्रभावित हुआ। इस बयान को ठाकरे गुट पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
मेयर पद पर देवेंद्र फडणवीस की खुली घोषणा
सभा का सबसे अहम पल तब आया, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के मेयर पद को लेकर चल रहे सस्पेंस को खत्म कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मुंबई का मेयर महायुति का ही होगा। फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि मेयर मराठी होगा और हिंदू समाज से होगा। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पहले ही अपनी स्थिति साफ कर चुके हैं और अब खुद वे भी सार्वजनिक मंच से यह बात दोहरा रहे हैं।
देवेंद्र फडणवीस के इस बयान को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में यह चर्चा जोर पकड़ रही थी कि मेयर पद को लेकर अलग-अलग समुदायों के नाम उछाले जा रहे हैं। फडणवीस की इस घोषणा के बाद विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। यह बयान सीधे तौर पर मुंबई के मराठी मतदाताओं और पारंपरिक वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। महायुति इस संदेश के जरिए यह बताने की कोशिश कर रही है कि मुंबई की सत्ता और पहचान दोनों सुरक्षित हाथों में रहेंगी।
विपक्ष पर देवेंद्र फडणवीस ने कसा तंज
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने AIMIM नेता के बयान का जिक्र करते हुए विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब यह कहा गया कि मुंबई में बुर्का पहनने वाली मेयर बनेगी, तब मराठी मानुष की बात करने वाले नेताओं की आवाज अचानक गायब हो गई। देवेंद्र फडणवीस ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ऐसा लगा जैसे “भोंगों की सेल ही डाउन हो गई हो” और सुबह का भोंगा तक नहीं बोला। इस टिप्पणी को संजय राउत और ठाकरे गुट पर सीधा तंज माना जा रहा है।
भाषण के अंत में देवेंद्र फडणवीस ने मुंबईकरों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि उनकी सरकार सिर्फ वादे नहीं करती, बल्कि काम के ठोस नतीजे जमीन पर दिखाती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सिर्फ बोर्ड लगाने में विश्वास रखते हैं, जबकि महायुति के काम आज मुंबई में स्मारकों की तरह खड़े हैं। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि आने वाले महानगरपालिका चुनाव में महायुति को मौका दिया जाए, ताकि पारदर्शी शासन के जरिए मुंबई का चेहरा और बदला जा सके। देवेंद्र फडणवीस की यह अपील और मेयर को लेकर की गई स्पष्ट घोषणा ने साफ कर दिया है कि मुंबई का चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
