उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों में किसानों के खेतों के पास ही खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि किसानों को अपनी फसल दूर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें बेहतर दाम मिल सकेंगे। सरकार का मानना है कि कच्चे माल की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग होने से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसान सीधे लाभ में आएंगे। यही वजह है कि इस योजना को किसानों के लिए “आय दोगुनी” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
125 करोड़ का निवेश, किन जिलों को मिलेगा फायदा
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत 125 करोड़ रुपये के निवेश से प्रदेश में 10 नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने की तैयारी है। शुक्रवार को हुई अप्रेजल समिति की बैठक में कुल 12 निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 10 प्रस्तावों को मंजूरी के लिए राज्य स्तरीय एंपावर्ड कमेटी को भेजने की संस्तुति की गई है। इन प्रस्तावित इकाइयों में सीतापुर, अंबेडकरनगर, शाहजहांपुर, लखनऊ, पीलीभीत, अलीगढ़, बरेली और मेरठ से एक-एक, जबकि सहारनपुर से दो परियोजनाएं शामिल हैं। इससे साफ है कि सरकार का फोकस सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में संतुलित औद्योगिक विकास पर है। इन इकाइयों के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं को अपने ही जिले में काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
किसानों की आय बढ़ाने की खास रणनीति
अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बीएल मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह स्पष्ट निर्देश दिए गए कि इन फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिलना चाहिए। समिति ने निवेशकों से कहा है कि कच्चे माल की आपूर्ति के लिए कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs) और किसान समूहों को प्राथमिकता दी जाए। इससे किसानों को फसल का स्थायी बाजार मिलेगा और कीमतों में उतार-चढ़ाव से होने वाला नुकसान कम होगा। इसके अलावा, पहले से स्थापित और सफल इकाइयों जैसे गोरखपुर की औरा एग्रोटेक और एटा की जुपीटर फूड प्रोडक्ट्स इंडिया को उनके बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिए गए। इससे नए निवेशकों और उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा कि वे आधुनिक तकनीक के साथ खेती आधारित उद्योगों में निवेश करें।
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा और यूपी की नई पहचान
इस पूरी योजना का एक अहम पहलू ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देना भी है। समिति ने साफ कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में भारत में बनी मशीनों और उपकरणों का ही अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। इससे न केवल देशी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मशीनों की लागत और रखरखाव भी आसान होगा। जानकारों का मानना है कि योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित कर सकती है। जब खेत के पास ही फैक्ट्री होगी, तो किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि कृषि-उद्यमी भी बनेगा। यही मॉडल आने वाले समय में यूपी की अर्थव्यवस्था, रोजगार और किसानों की आमदनी—तीनों को नई दिशा दे सकता है।
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