Sunday, February 1, 2026
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सीजफायर का क्रेडिट किसका? ट्रंप के बाद चीन की एंट्री, भारत ने एक झटके में किया खारिज, पाकिस्तान क्यों उछल पड़ा

India Pakistan Ceasefire पर ट्रंप के बाद चीन ने भी मध्यस्थता का दावा किया, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने चीन का समर्थन क्यों किया, पूरी खबर पढ़ें।

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भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद लागू हुए सीजफायर को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अजीब सी होड़ देखने को मिल रही है। सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया कि भारत-पाक तनाव कम कराने में अमेरिका की अहम भूमिका रही। भारत ने उस वक्त भी साफ कर दिया था कि किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई। अब इसी कड़ी में चीन ने भी यह कहकर हलचल मचा दी है कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में भूमिका निभाई। इस दावे के सामने आते ही नई बहस छिड़ गई कि आखिर इस सीजफायर का असली फैसला कैसे और किन हालात में हुआ। भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए चीन के बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया, जबकि पाकिस्तान एक बार फिर बाहरी ताकतों के समर्थन में खुलकर सामने आ गया।

चीन के समर्थन में पाकिस्तान

चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बयान के बाद पाकिस्तान ने बिना देर किए बीजिंग का समर्थन कर दिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन लगातार पाकिस्तान के संपर्क में था और उसने भारत के नेतृत्व से भी बातचीत की थी। उनके मुताबिक 6 मई से 10 मई के बीच चीन की कूटनीतिक कोशिशों से तनाव कम करने में मदद मिली। पाकिस्तान का यह बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि जब भी कोई देश भारत-पाक मसले में दखल देने की बात करता है, पाकिस्तान उसे तुरंत स्वीकार कर लेता है। पाकिस्तान ने यह भी संकेत देने की कोशिश की कि चीन की भूमिका केवल सलाह तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसने सक्रिय रूप से शांति स्थापित करने का प्रयास किया।

चीन ने किन-किन विवादों में खुद को बताया मध्यस्थ

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में दावा किया कि मौजूदा समय में दुनिया में संघर्ष और सीमा विवाद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे ज्यादा बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि चीन ने “हॉटस्पॉट डिप्लोमेसी” के तहत कई संवेदनशील मामलों में बीच-बचाव किया। वांग यी ने उत्तर म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, भारत-पाकिस्तान तनाव, फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष और कंबोडिया-थाईलैंड विवाद का जिक्र किया। उनका कहना था कि चीन ने न सिर्फ समस्याओं के लक्षणों, बल्कि जड़ कारणों पर भी ध्यान दिया। भारत-पाकिस्तान को लेकर चीन का नाम लेना भारत के लिए अस्वीकार्य था, क्योंकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होती।

भारत का दो टूक जवाब

चीन और पाकिस्तान के दावों पर भारत ने बेहद साफ और कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। भारत सरकार ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का फैसला दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के बाद हुआ। इसमें न तो अमेरिका, न चीन और न ही किसी अन्य देश की कोई भूमिका थी। भारत ने दोहराया कि वह अपने पड़ोसी देशों के साथ मुद्दों को द्विपक्षीय ढांचे में ही सुलझाने में विश्वास रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को कमजोर स्थिति से निकालने के लिए बार-बार बाहरी ताकतों का नाम लेता है, जबकि भारत की नीति हमेशा स्पष्ट और स्थिर रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सीजफायर भले ही जमीन पर लागू हो गया हो, लेकिन कूटनीतिक लड़ाई अभी भी जारी है।

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