कोटा में रविवार को उस वक्त राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब शहर के प्रसिद्ध हैंगिंग ब्रिज पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का काफिला अचानक रुक गया. गोरक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मृत गोवंश के निस्तारण में हो रही कथित लापरवाही के विरोध में पदयात्रा निकाल रखी थी. इसी दौरान जब वसुंधरा राजे का काफिला वहां से गुजर रहा था, तो प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोककर अपनी नाराजगी जाहिर की. मौके पर कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही. कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे पिछले दो हफ्तों से नगर निगम और प्रशासन को चेताते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही. उनका आरोप है कि गोवंश से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता की कमी है और बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं. यही वजह है कि उन्होंने प्रतीकात्मक विरोध के रूप में हैंगिंग ब्रिज को चुना, ताकि उनकी आवाज सीधे सत्ता और प्रशासन तक पहुंचे.
गोरक्षकों के आरोप और जमीनी हालात
प्रदर्शन कर रहे गोरक्षकों ने नगर निगम से जुड़े ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि मृत गायों को तय नियमों के अनुसार सम्मानजनक तरीके से निस्तारित करने के बजाय खुले मैदानों, खाली प्लॉटों और सड़क किनारे फेंका जा रहा है. कई जगहों पर गोवंश को रस्सियों से बांधकर सड़कों पर घसीटते हुए ले जाने के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आने की बात कही गई. गोरक्षकों के मुताबिक यह न सिर्फ अमानवीय व्यवहार है, बल्कि धार्मिक आस्था का भी खुला अपमान है. उनका कहना है कि गाय को सनातन परंपरा में माता का दर्जा दिया गया है, ऐसे में मृत गोवंश के साथ इस तरह का व्यवहार समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है. इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़े खतरे भी गिनाए. सड़कों और आबादी के पास शव पड़े रहने से दुर्गंध फैल रही है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. स्थानीय लोगों की शिकायत है कि कई इलाकों में सांस लेना तक मुश्किल हो गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं.
वसुंधरा राजे का बयान और प्रशासन पर सवाल
काफिला रोके जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी बात ध्यान से सुनी. इस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह खुद सनातनी हैं और गोवंश के सम्मान को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए. वसुंधरा राजे ने कहा कि समस्या की जड़ अफसरों की सुस्ती और जिम्मेदारी से बचने का रवैया है. उन्होंने माना कि यदि समय रहते प्रशासन सक्रिय होता, तो गोरक्षकों को सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती. पूर्व CM ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि नियम सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी दिखने चाहिए. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाएगा और नगर निगम से लेकर जिला प्रशासन तक जवाबदेही तय होनी चाहिए. उनके इस बयान के बाद प्रदर्शनकारियों में कुछ हद तक संतोष जरूर दिखा, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा.
आंदोलन की चेतावनी
गोरक्षकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मृत गोवंश के निस्तारण की व्यवस्था तुरंत नहीं सुधारी गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उनका कहना है कि यह केवल एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में कई जगहों पर यही हाल है. उन्होंने मांग की कि ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और गोवंश के निस्तारण के लिए स्थायी व सम्मानजनक व्यवस्था बनाई जाए. इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है. विपक्ष ने सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे स्थानीय स्तर की समस्या बता रहा है. हालांकि, हैंगिंग ब्रिज पर काफिला रुकने की घटना ने यह साफ कर दिया है कि गोवंश से जुड़ा मुद्दा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, स्वास्थ्य और राजनीतिक आयाम भी रखता है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन वाकई जमीन पर बदलाव करता है या यह मामला भी फाइलों में ही सिमट कर रह जाता है.
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