थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पिछले कई हफ्तों से जारी तनाव और हिंसक संघर्ष को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच चल रही जंग को फिलहाल रोक दिया गया है और इसके पीछे अमेरिका की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए एक नए समझौते के तहत थाईलैंड और कंबोडिया ने सीजफायर लागू करने पर सहमति जताई है। ट्रंप के अनुसार, यह फैसला अचानक लेकिन बेहद जरूरी था, ताकि और ज्यादा जान-माल का नुकसान रोका जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पूरे घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह वैश्विक संकटों में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
नेताओं की तारीफ में बोले ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के शीर्ष नेताओं की खुले मंच से सराहना भी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए बेहद कम समय में एक निष्पक्ष समझौते पर पहुंचने का फैसला किया। ट्रंप के मुताबिक, ऐसे संघर्षों में तेजी और स्पष्टता सबसे अहम होती है, और इस मामले में दोनों देशों ने जिम्मेदारी दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को गर्व है कि वह हमेशा शांति प्रयासों में सहयोग के लिए आगे रहता है। ट्रंप ने संकेत दिए कि अगर भविष्य में भी दोनों देशों को किसी तरह की मध्यस्थता या सहायता की जरूरत पड़ी, तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।
‘US ही असली संयुक्त राष्ट्र बन गया है’ — UNO पर सीधा हमला
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ट्रंप के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए। ट्रंप ने कहा कि पिछले 11 महीनों में उन्होंने जितने भी युद्ध और संघर्ष खत्म कराए या रुकवाए हैं, उनमें संयुक्त राष्ट्र की भूमिका बेहद सीमित रही है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अब संयुक्त राज्य अमेरिका ही “वास्तविक संयुक्त राष्ट्र” बन गया है। ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी UNO की प्रभावशीलता सवालों के घेरे में रही है। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है, क्योंकि इससे UNO की वैश्विक प्रासंगिकता पर सीधा सवाल उठता है।
सीजफायर की पृष्ठभूमि
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यह सीजफायर शनिवार, 27 दिसंबर 2025 को लागू करने पर सहमति बनी थी। सीमा विवाद को लेकर बढ़े तनाव ने बीते करीब 20 दिनों में हिंसक रूप ले लिया था। इस संघर्ष में दोनों देशों के कम से कम 100 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए। सीमा से सटे इलाकों में हालात बेहद गंभीर हो गए थे, जहां आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। ऐसे में सीजफायर को राहत की बड़ी खबर माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी शांति के लिए दोनों देशों को दीर्घकालिक समाधान और अंतरराष्ट्रीय निगरानी की जरूरत होगी।
