केरल के पलक्कड़ ज़िले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है। छत्तीसगढ़ से रोज़गार की तलाश में आए एक मज़दूर की कथित तौर पर भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान 31 वर्षीय रामनारायण बघेल के रूप में हुई है, जो छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले के करही गांव के रहने वाले थे। परिवार का आरोप है कि रामनारायण को बांग्लादेशी कहकर घेरा गया और बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद केरल की राजनीति गरमा गई है और समाज में बाहरी मज़दूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री से लेकर विपक्ष तक, हर कोई इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है।
काम की उम्मीद लेकर केरल पहुंचे थे रामनारायण
रामनारायण बघेल पिछले हफ्ते की शुरुआत में केरल के पलक्कड़ ज़िले के वालायर इलाके में पहुंचे थे। वह यहां एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने आए थे, जहां उनका चचेरा भाई शशिकांत बघेल पहले से काम कर रहा था। परिवार के अनुसार, रामनारायण घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर केरल गए थे। लेकिन 17 दिसंबर को यह उम्मीद हमेशा के लिए टूट गई। उसी दिन शशिकांत को वालायर पुलिस का फोन आया कि रामनारायण को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया है। जब शशिकांत अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि इलाज शुरू होने से पहले ही रामनारायण की मौत हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक, रामनारायण पर डंडों, लोहे की पाइपों और अन्य खतरनाक वस्तुओं से हमला किया गया था, जिससे उनके शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं।
‘बांग्लादेशी’ कहकर घेरने का आरोप
मृतक के चचेरे भाई शशिकांत बघेल ने मीडिया को बताया कि रामनारायण को भीड़ ने पहले घेरा और फिर उन्हें बांग्लादेशी कहकर पीटना शुरू कर दिया। शशिकांत का कहना है कि रामनारायण पूरी तरह से स्थानीय भाषा नहीं जानते थे और शायद इसी वजह से शक किया गया। परिवार का आरोप है कि बिना किसी पुष्टि के उन पर विदेशी होने का ठप्पा लगा दिया गया और फिर हिंसा की गई। उधर, छत्तीसगढ़ के करही गांव में मातम पसरा हुआ है। रामनारायण की मां का कहना है कि उनका बेटा ही परिवार की आखिरी उम्मीद था और उसकी मौत के साथ ही उनका सहारा भी छिन गया। गांव में हर आंख नम है और लोग यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर मेहनत-मज़दूरी करने गए एक इंसान की जान इतनी बेरहमी से कैसे ली जा सकती है।
केरल सरकार, बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने
इस घटना के बाद केरल में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं केरल जैसे सभ्य और प्रगतिशील समाज की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। वहीं, उनकी ही सरकार के एक मंत्री ने आरोप लगाया कि यह घटना नफ़रत की राजनीति का नतीजा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अभियुक्तों में अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े लोग हैं और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है। बीजेपी का कहना है कि यह मामला स्थानीय बनाम बाहरी का है, न कि किसी संगठित राजनीतिक साजिश का। हालांकि, इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश में प्रवासी मज़दूरों की सुरक्षा, भीड़ हिंसा और पहचान के आधार पर किए जा रहे हमलों को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या मेहनत करने देश के दूसरे कोने में जाने वाला मज़दूर आज भी सुरक्षित है?
