कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब और दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच संतुलन साधने में जुटी कांग्रेस के सामने अब एक नया समीकरण खड़ा हो गया है। राज्य के गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, परमेश्वर हाईकमान से मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं, जिससे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में हलचल और बढ़ गई है। पार्टी के भीतर इसे सत्ता संतुलन की नई कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा फैसला निकल सकता है।
दिल्ली दौरे की तैयारी, सोनिया गांधी से मुलाकात की उम्मीद
डॉ. जी परमेश्वर 26 दिसंबर को दिल्ली जा सकते हैं। उसी दिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें संगठन और राज्यों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है। माना जा रहा है कि परमेश्वर इस मौके का इस्तेमाल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत के लिए कर सकते हैं। खास बात यह है कि परमेश्वर के कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के साथ पुराने और अच्छे संबंध माने जाते हैं। यही वजह है कि उनके समर्थक उम्मीद जता रहे हैं कि हाईकमान उनकी बात गंभीरता से सुनेगा। लंबे समय से दिल्ली की राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले परमेश्वर की अचानक सक्रियता को सत्ता समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
डिप्टी CM पद पर भी नजर, अंदरखाने तेज लॉबिंग
हालांकि, पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि अगर परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद नहीं मिलता है तो उन्हें डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। बताया जा रहा है कि उनके समर्थक लगातार दिल्ली में उनके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन यहां भी राह आसान नहीं है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे भी डिप्टी सीएम पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक मजबूती जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की चुनौती है। डिप्टी सीएम का पद अब सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन का अहम हथियार बन चुका है।
परमेश्वर का बयान और हाईकमान की अग्निपरीक्षा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डॉ. जी परमेश्वर ने सार्वजनिक तौर पर संतुलित बयान दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा पार्टी हाईकमान के फैसले को सर्वोपरि माना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे कांग्रेस नेतृत्व के हर फैसले का पालन करेंगे। हालांकि, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस तरह के बयान अक्सर रणनीतिक होते हैं। अब असली सवाल यह है कि कांग्रेस हाईकमान सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और परमेश्वर जैसे दिग्गज नेताओं के बीच किस तरह संतुलन बनाता है। आने वाले दिन कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं, क्योंकि एक फैसला कई सियासी समीकरण बदल सकता है।
