नए साल से पहले उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने खेती को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि अब उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के माध्यम से किसानों को मात्र छह प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। अभी तक किसानों को इसी ऋण के लिए लगभग 11.50 प्रतिशत तक ब्याज चुकाना पड़ता था, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही थी। सरकार के इस फैसले से लघु और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, जो महंगे कर्ज के कारण खेती छोड़ने या कर्ज के बोझ में दबने को मजबूर हो जाते थे। ब्याज की शेष राशि अब राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी, जिससे किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और वे आत्मनिर्भर होकर खेती कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
यह महत्वपूर्ण घोषणा मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत की गई, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें सस्ती वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। यह ऐलान अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के समापन अवसर पर आयोजित युवा सहकार सम्मेलन और यूपी को-आपरेटिव एक्सपो-2025 के उद्घाटन कार्यक्रम में किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सामाजिक समानता और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव है। उन्होंने बताया कि सहकारी ढांचे को मजबूत करने से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार की मंशा है कि किसान सीधे सहकारी संस्थाओं से जुड़कर सस्ता कर्ज, बीज, खाद और अन्य सुविधाएं प्राप्त करें, जिससे खेती लाभ का सौदा बने।
सहकारिता आंदोलन को नई दिशा, रिकॉर्ड सदस्यता और मुनाफा
सरकार द्वारा सहकारिता क्षेत्र में किए गए सुधारों के सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। एम-पैक्स यानी बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से सदस्यता और वित्तीय समावेशन को तेजी से बढ़ावा दिया गया। सितंबर से नवंबर 2025 के बीच चलाए गए विशेष सदस्यता अभियान में 24 लाख नए सदस्य जुड़े, जिससे 43 करोड़ रुपये का शेयर कैपिटल प्राप्त हुआ। इसी अवधि में जिला सहकारी बैंकों में दो लाख नए खाते खोले गए और करीब 550 करोड़ रुपये का अतिरिक्त डिपॉजिट दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले कई जिला सहकारी बैंक डिफॉल्टर घोषित हो चुके थे, लेकिन समय पर सुधारात्मक कदम उठाने से अब सभी बैंक न केवल स्वस्थ हैं, बल्कि मुनाफे में भी चल रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में सहकारी बैंकों ने 162 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया, जो सहकारिता क्षेत्र में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
एम-पैक्स को ब्याज मुक्त ऋण, खाद आपूर्ति और नए बैंक की तैयारी
सरकार ने एम-पैक्स को और मजबूत बनाने के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण देने की व्यवस्था की है, जिसे जल्द ही 15 लाख रुपये तक बढ़ाने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा 6760 एम-पैक्स को उर्वरक व्यवसाय के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया, जिससे प्रदेश में खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बलरामपुर में नए जिला सहकारी बैंक की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ से होती थी, लेकिन अब राज्य ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन को-आपरेटिव बैंक’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह बदलाव न केवल किसानों के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि ग्रामीण विकास, रोजगार और आर्थिक स्थिरता को भी नई मजबूती देगा।
