उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब एक बुजुर्ग फरियादी अधिकारियों के सामने खड़ा होकर चिल्ला पड़ा— “साहब, मैं जिंदा हूं!” यह मामला पुरवा तहसील का है, जहां एडीएम (न्यायिक) अमिताभ यादव शिकायतों की सुनवाई कर रहे थे। अकोहरी गांव के निवासी सीताराम ने आरोप लगाया कि हल्का लेखपाल ने मिलीभगत और लापरवाही के चलते उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं, उनकी मौत दिखाकर उनकी वरासत (जमीन का हक) भी दर्ज कर दी गई। यह सुनकर मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी हैरान रह गए। एडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार को तुरंत जांच के आदेश दिए और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
मासूम की पुकार: माता-पिता के जाने के बाद जमीन पर दबंगों का कब्जा
समाधान दिवस में केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि एक 12 वर्षीय मासूम की व्यथा ने भी सबका दिल दहला दिया। गौरिया कला निवासी अर्जुन, जो महज 12 साल का है, अपने चाचा के साथ जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पास पहुंचा। अर्जुन ने बताया कि जब वह दो साल का था तब उसके पिता का साया सिर से उठ गया और सात साल की उम्र में मां भी चल बसी। बेसहारा अर्जुन की पुश्तैनी 12 बिस्वा जमीन पर गांव के ही कुछ दबंगों ने कब्जा कर लिया है। अनाथ बच्चे की पीड़ा सुनकर डीएम ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को निर्देश दिया कि वे खुद मौके पर जाएं और बच्चे को उसकी जमीन वापस दिलाकर मामले का निस्तारण सुनिश्चित करें।
शिकायतों का अंबार: न्याय की आस में भटकते ग्रामीण
उन्नाव की विभिन्न तहसीलों में आयोजित इस समाधान दिवस में शिकायतों की लंबी फेहरिस्त देखने को मिली। अधिकतर मामले राजस्व विभाग, पुलिस और विकास खंड से संबंधित थे। कई फरियादियों ने यह भी शिकायत की कि उन्होंने पहले भी समाधान दिवस में अपनी समस्याएं दर्ज कराई थीं, लेकिन प्रशासन की फाइलों में वे मामले आज भी लंबित हैं। पुरवा के अलावा सफीपुर और बीघापुर तहसीलों में भी बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे। कई मामलों में बुजुर्गों ने पेंशन न मिलने और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में हो रही देरी को लेकर भी नाराजगी जाहिर की।
अधिकारियों की सख्ती: लापरवाही बरतने वालों पर गिरेगी गाज
समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि जन समस्याओं के निस्तारण में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि आईजीआरएस पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि निस्तारण के बाद भी फरियादी संतुष्ट नहीं होते, ऐसे में अधिकारी स्वयं फीडबैक का अवलोकन करें। इस दौरान स्वास्थ्य शिविरों और समाज कल्याण विभाग के स्टालों के जरिए सरकार की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि पात्र ग्रामीणों को सीधे तौर पर लाभ मिल सके।
