महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बिना नाम लिए उन पर जोरदार हमला बोला और कहा कि कुछ लोग मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। फडणवीस ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के गैर-जिम्मेदार बयानों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये देश की सुरक्षा और सेना के मनोबल से जुड़े बेहद संवेदनशील विषय हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दे पर दिए गए बयान आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर सकते हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा नीति और सेना की कार्रवाई से जुड़ा हुआ मामला है।
क्या कहा था पूर्व मुख्यमंत्री ने
दरअसल, 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पहले दिन पाकिस्तान के साथ हुई हवाई झड़प को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि इस ऑपरेशन में भारत को पूर्ण पराजय का सामना करना पड़ा। उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। कई नेताओं ने इस टिप्पणी को देश विरोधी करार दिया, वहीं कुछ ने इसे तथ्यों से परे बताया। विपक्षी दलों ने चव्हाण के बयान को व्यक्तिगत राय बताया, लेकिन सत्तारूढ़ दल ने इसे सेना और देश के सम्मान पर हमला बताया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने सवाल उठाए कि क्या इस तरह के बयान राजनीतिक लाभ के लिए दिए जा रहे हैं। आम जनता के बीच भी इस बयान को लेकर नाराजगी देखने को मिली, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम माना जा रहा है।
देवली की सभा में फडणवीस का तीखा पलटवार
गुरुवार (18 दिसंबर) को देवली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बयान पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं को क्या हो गया है। कुछ दिन पहले कांग्रेस के एक नेता ने यह दावा कर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत पाकिस्तान से हार गया।” फडणवीस ने आगे कहा कि ऐसे बयान देने वाले लोग या तो तथ्यों से अनजान हैं या फिर जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश की सेना ने हमेशा साहस और पराक्रम का परिचय दिया है और इस तरह के बयान सैनिकों के मनोबल को तोड़ने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने मंच से यह संदेश देने की कोशिश की कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी दलों को एकजुट होकर देश के साथ खड़ा होना चाहिए।
बयानबाजी के सियासी मायने
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुरू हुई यह बयानबाजी सिर्फ एक नेता के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के माहौल में ऐसे मुद्दों को उछालकर राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस का सख्त रुख यह संकेत देता है कि भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद से जोड़कर विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस के सामने भी यह चुनौती है कि वह अपने नेता के बयान से उपजे विवाद को कैसे संभाले। इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
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