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2 रुपए में बनती थी क्रीम, 100 रुपए में बिकती थी, यूपी के इस जिले में नकली मेडिकेटेड फैक्ट्री का काला सच आया सामने

गाजियाबाद के लोनी में पकड़ी गई नकली मेडिकेटेड क्रीम फैक्ट्री से चौंकाने वाला खुलासा। 2 रुपए लागत की क्रीम नामी ब्रांड की पैकिंग में भरकर 100 रुपए तक बेची जा रही थी।

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यूपी के गाजियाबाद के लोनी इलाके में दिल्ली पुलिस की स्पेशल क्राइम ब्रांच की कार्रवाई ने एक बड़े स्वास्थ्य खतरे को उजागर कर दिया है। मीरपुर इलाके में चल रही नकली मेडिकेटेड स्किन क्रीम फैक्ट्री पर रविवार को छापा मारकर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाहर से यह जगह एक सामान्य गोदाम जैसी दिखती थी, लेकिन अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। छोटी-सी जगह में सस्ते रसायन, खाली ट्यूब, नामी कंपनियों के नकली रैपर और पैकिंग मशीनें रखी हुई थीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह फैक्ट्री लंबे समय से चोरी-छिपे चल रही थी और स्थानीय लोगों को इसकी भनक तक नहीं थी। पुलिस के अनुसार, यहां तैयार की जा रही क्रीम को मेडिकेटेड बताकर बाजार में बेचा जा रहा था, जिससे लोगों की त्वचा और सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा था।

डेढ़ से दो रुपए लागत, मुनाफा सौ गुना

गिरफ्तारी के बाद जब आरोपियों से पूछताछ की गई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। आरोपियों ने कबूल किया कि वे बेहद घटिया और सस्ते रसायनों का इस्तेमाल कर क्रीम बनाते थे। एक ट्यूब तैयार करने में उनकी लागत महज डेढ़ से दो रुपए आती थी। इसके बाद इस क्रीम को नामी और भरोसेमंद ब्रांड की नकली पैकिंग में भर दिया जाता था, ताकि ग्राहक को कोई शक न हो। यह नकली क्रीम होलसेल बाजार में 12 से 15 रुपए प्रति ट्यूब के हिसाब से सप्लाई की जाती थी। वहीं खुदरा दुकानों पर यही क्रीम 70 से 100 रुपए तक में बेची जाती थी। इस पूरे खेल में असली मुनाफा गिरोह के सरगनाओं को होता था, जबकि दुकानदार और ग्राहक अनजाने में इस धोखाधड़ी का हिस्सा बन जाते थे।

दिल्ली-एनसीआर से बाहर तक फैला नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में यह अवैध धंधा सीमित स्तर पर चल रहा था, लेकिन धीरे-धीरे मांग बढ़ने लगी। ज्यादा मुनाफे के लालच में आरोपियों ने सप्लाई नेटवर्क को दिल्ली-एनसीआर से बाहर तक फैला दिया। खासतौर पर उन इलाकों को चुना गया जहां दवा दुकानों की जांच कम होती है और ग्राहक डॉक्टर की सलाह के बिना सिर्फ ब्रांड देखकर दवा या क्रीम खरीद लेते हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह छोटे मेडिकल स्टोर और कॉस्मेटिक दुकानों को निशाना बनाता था, जहां सस्ती दर पर माल देकर जल्दी सप्लाई का लालच दिया जाता था। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में अभी और लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश के लिए अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की जा रही है।

सेहत से खिलवाड़, जांच एजेंसियां अलर्ट

नकली मेडिकेटेड क्रीम का यह मामला सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि आम लोगों की सेहत से सीधा खिलवाड़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि घटिया रसायनों से बनी ऐसी क्रीम त्वचा पर एलर्जी, जलन, संक्रमण और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। पुलिस ने फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में तैयार क्रीम, कच्चा माल और पैकिंग सामग्री जब्त की है। साथ ही संबंधित ड्रग विभाग को भी मामले की जानकारी दी गई है, ताकि बाजार में मौजूद ऐसे नकली उत्पादों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके। पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे मेडिकेटेड क्रीम या दवाएं केवल विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध पैकिंग या असामान्य कीमत पर सतर्क रहें। इस खुलासे के बाद साफ है कि सस्ती कमाई के लालच में कुछ लोग किस तरह आम जनता की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

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