हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन इस ठंड से भी ज्यादा सख्त है उन महिलाओं का इरादा, जो नशे के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी हैं। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला स्थित लघट गांव की महिलाएं रोजाना रात के समय अपने घरों से निकलकर गांव की सड़कों पर पहरा दे रही हैं। सिर पर शॉल, हाथों में टॉर्च और डंडा लिए ये महिलाएं छोटी-छोटी टोलियों में बंटकर गांव के हर रास्ते पर नजर रखती हैं। उम्र 25 साल से लेकर 50 साल तक की महिलाएं इस मुहिम में शामिल हैं। न तो अंधेरे का डर है और न ही ठंड की परवाह, क्योंकि इनके सामने सबसे बड़ा सवाल अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ी का भविष्य है। महिलाओं का कहना है कि अगर आज आवाज नहीं उठाई गई, तो चिट्टा जैसे नशे से पूरे गांव का माहौल खराब हो जाएगा।
चिट्टे के खिलाफ जंग
लघट गांव की महिलाएं यह लड़ाई किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि मजबूरी में लड़ रही हैं। चिट्टा, जो युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है, गांव के कई परिवारों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन चुका है। महिलाएं मानती हैं कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को तोड़ देता है। इसी डर ने उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर किया। महिला मंडल लघट से जुड़ी महिलाएं एकजुट होकर यह पहरा दे रही हैं, ताकि कोई भी नशा तस्कर गांव के भीतर आसानी से घुस न सके। उनका साफ कहना है कि सरकार और पुलिस अपने स्तर पर काम कर रही है, लेकिन जब तक समाज खुद जागरूक नहीं होगा, तब तक इस जहर को रोका नहीं जा सकता। यह पहरा उनके लिए सुरक्षा के साथ-साथ एक संदेश भी है कि गांव अब चुप नहीं बैठेगा।
रात में बढ़ती आवाजाही बनी चिंता
महिलाओं के अनुसार, हाल के समय में गांव में एक नया लिंक रोड बना है, जिसके बाद रात के समय बाहरी लोगों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है। अंजू शर्मा और कुसुमलता जैसी महिलाएं, जो रोजाना पहरा देती हैं, बताती हैं कि अंधेरे का फायदा उठाकर नशा तस्कर युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। लघट गांव दो पंचायतों—बैरी रजादियां और बरमाणा—को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग है। बरमाणा एक औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां दिन-रात वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। इसी भीड़ और आवाजाही की आड़ में नशा माफिया सक्रिय रहता है। महिलाओं का कहना है कि अगर वे सतर्क नहीं रहीं, तो गांव के युवा आसानी से गलत रास्ते पर जा सकते हैं। इसी वजह से वे संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी करती हैं और जरूरत पड़ने पर पंचायत व पुलिस को सूचना देती हैं।
गांव की सुरक्षा से सामाजिक बदलाव तक, महिलाओं की मिसाल
लघट गांव की यह पहल अब सिर्फ पहरे तक सीमित नहीं रही है, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रही है। महिलाएं गांव के युवाओं और परिवारों को भी नशे के खिलाफ जागरूक कर रही हैं। उनका मानना है कि डर से नहीं, बल्कि एकजुटता से ही नशा तस्करों को हराया जा सकता है। यह पहरा गांव में सुरक्षा का माहौल बना रहा है और तस्करों के लिए साफ संदेश है कि अब यहां उनकी मनमानी नहीं चलेगी। महिलाओं की यह हिम्मत पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन रही है। ठंड भरी रातों में डंडा और टॉर्च लेकर खड़ी ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि जब बात बच्चों के भविष्य की हो, तो कोई भी डर बड़ा नहीं होता।
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