श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से गहराई से जुड़े रहे वरिष्ठ संत, पूर्व सांसद और रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन हो गया है. उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर सामने आते ही अयोध्या सहित पूरे संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई. डॉ. वेदांती लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और इलाज के लिए रीवा में भर्ती थे. उनके अनुयायियों और समर्थकों के लिए यह खबर किसी बड़े आघात से कम नहीं है. अयोध्या में उन्हें एक निर्भीक वक्ता, संघर्षशील नेता और सनातन संस्कृति के प्रखर प्रवक्ता के रूप में जाना जाता था. उनका जीवन धार्मिक आस्था, सामाजिक चेतना और राष्ट्रवादी विचारधारा को समर्पित रहा. उनके जाने से राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा एक ऐसा चेहरा चला गया, जिसने दशकों तक इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.
सीएम योगी का भावुक संदेश
डॉ. रामविलास वेदांती के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए उन्हें श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का प्रमुख स्तंभ बताया. योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि उनका गोलोकगमन आध्यात्मिक जगत और सनातन संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने डॉ. वेदांती के त्यागमय जीवन को धर्म, समाज और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरणास्रोत बताया. सीएम योगी ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान मिले और उनके शिष्यों व अनुयायियों को इस गहरे दुख को सहन करने की शक्ति प्राप्त हो. मुख्यमंत्री के इस संदेश के बाद राजनीतिक और धार्मिक जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भी डॉ. वेदांती के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके योगदान को याद किया.
राम जन्मभूमि आंदोलन में निर्णायक भूमिका, संसद से सड़क तक बुलंद आवाज
डॉ. रामविलास दास वेदांती को राम जन्मभूमि आंदोलन के बड़े और मुखर चेहरों में गिना जाता था. उन्होंने अयोध्या से सांसद रहते हुए संसद के भीतर और बाहर राम मंदिर निर्माण की मांग को लगातार मजबूती से उठाया. आंदोलन के कठिन दौर में भी वे खुलकर अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटे. सड़कों पर जनसभाओं से लेकर राजनीतिक मंचों तक, उनका भाषण आंदोलनकारियों में नई ऊर्जा भरता था. संत होने के साथ-साथ वे एक ऐसे नेता भी थे, जो धार्मिक आस्था को सामाजिक और राजनीतिक विमर्श से जोड़कर देखते थे. उनके लिए राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक न्याय का विषय था. यही वजह रही कि वे लंबे समय तक इस आंदोलन के वैचारिक स्तंभ बने रहे और उनके विचारों का असर संत समाज से लेकर आम लोगों तक दिखा.
हालिया बयान और मांग, आखिरी समय तक सक्रिय रहे
डॉ. रामविलास वेदांती आखिरी समय तक सार्वजनिक मुद्दों पर सक्रिय नजर आए. हाल ही में उन्होंने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की थी कि अयोध्या की उन सड़कों के नाम बदले जाएं, जिनके नाम मुस्लिम शासकों या प्रतीकों से जुड़े हैं. उनका कहना था कि अयोध्या एक पवित्र धार्मिक नगरी है और यहां के नाम सनातन परंपरा और रामकथा से जुड़े होने चाहिए. इस मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा भी शुरू हुई थी. इससे साफ होता है कि बीमारी के बावजूद वे अयोध्या और राम से जुड़े मुद्दों को लेकर पूरी तरह सजग और सक्रिय थे. उनके निधन के साथ ही न सिर्फ एक संत और नेता, बल्कि राम जन्मभूमि आंदोलन के एक दौर का अंत हो गया है. आने वाले समय में उनके विचार और संघर्ष की विरासत उनके अनुयायियों और समर्थकों के जरिए आगे बढ़ती रहेगी.
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