भारत ने 17 से 20 दिसंबर 2025 तक बंगाल की खाड़ी में 2520 किलोमीटर तक का नो फ्लाई और नो शिप जोन घोषित किया है। यह निर्णय DRDO द्वारा निर्धारित लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के कारण लिया गया है। इसके तहत इस क्षेत्र से किसी भी नागरिक विमान या जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं होगी। NOTAM (Notice to Airmen/Air Mission) के अनुसार यह ज़ोन रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक लागू रहेगा।
यह क्षेत्र अक्टूबर में हुए पिछली परीक्षण गतिविधियों के 1480 किलोमीटर से काफी बड़ा है, जिससे संकेत मिलता है कि इस बार भारत किसी लंबी दूरी की और अधिक शक्तिशाली मिसाइल का परीक्षण कर सकता है। सुरक्षा कारणों से सभी नागरिक और वाणिज्यिक वाहनों को अपने मार्ग में बदलाव करना होगा।
DRDO का परीक्षण और सुरक्षा उपाय
नौसेना और वायुसेना इस समय पूरे क्षेत्र की निगरानी करेंगी। DRDO ने स्पष्ट किया है कि परीक्षण के दौरान मिसाइल के मलबे या किसी दुर्घटना की आशंका रहती है। इसलिए किसी भी प्रकार की जोखिम से बचने के लिए नागरिक जहाज और विमान अपने निर्धारित मार्ग से हटकर यात्रा करेंगे।
यह कदम न केवल परीक्षण की सुरक्षा के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री और हवाई मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के बड़े क्षेत्र में मिसाइल परीक्षण करना तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से आवश्यक है, ताकि लंबी दूरी की मारक क्षमता का परीक्षण सुरक्षित और प्रभावी तरीके से हो सके।
पड़ोसी देशों में हाहाकार
भारत के इस निर्णय के बाद पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में खलबली की स्थिति है। बांग्लादेश में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर हुई हिंसा और आगजनी ने राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। वहीं, पाकिस्तान में देश की खुफिया एजेंसी ISI के पूर्व चीफ फैज हमीद को कोर्ट मार्शल किया गया, जिससे सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत द्वारा घोषित नो फ्लाई और नो शिप जोन का उद्देश्य पूरी तरह से सुरक्षा और परीक्षण की सुविधा देना है। इसके बावजूद, पड़ोसी देशों में इस निर्णय को लेकर अफवाहें और गलतफहमियां तेजी से फैल रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय और रणनीतिक महत्व
बंगाल की खाड़ी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो भारत और पड़ोसी देशों के लिए समुद्री सुरक्षा और वायु सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के दौरान कोई भी अनियंत्रित घटना बड़ी सुरक्षा चुनौती पैदा कर सकती है।
इस क्षेत्र में नौसेना और वायुसेना की लगातार निगरानी सुनिश्चित करती है कि परीक्षण के दौरान कोई भी नागरिक या वाणिज्यिक गतिविधि प्रभावित न हो। भारत के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री और हवाई मार्गों पर सुरक्षा की स्थिति मजबूत होगी और किसी भी आकस्मिक दुर्घटना की संभावना न्यूनतम होगी।
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