राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से किसानों का विरोध simmering था, लेकिन बुधवार को स्थिति अचानक बिगड़ गई। राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित 40 मेगावाट के अनाज आधारित एथेनॉल प्लांट का निर्माण शुरू होते ही ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी बढ़ने लगी थी। उनका कहना था कि ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड बिना पर्यावरण मंजूरी के काम कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय प्रभाव, प्रदूषण और भूजल के भविष्य को लेकर उनकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। बुधवार को जैसे ही प्लांट की निर्माणाधीन दीवार को तोड़ा गया, माहौल भड़क गया और सैकड़ों लोग विरोध स्थल पर जमा हो गए। इसी तनाव ने कुछ ही मिनटों में हिंसक रूप ले लिया और क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
पथराव, आगजनी और घायल विधायक—धरना स्थल बना रणभूमि
दीवार टूटने के बाद गुस्साए किसानों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने हालात संभालने के लिए पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ और भड़क गई। देखते ही देखते पथराव इतना तेज हो गया कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। विरोध प्रदर्शन की आग इतनी बढ़ी कि किसानों ने 14 वाहनों को आग के हवाले कर दिया। हालात के बिगड़ने का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया भी इस झड़प में घायल हो गए। जानकारी के अनुसार इस टकराव में 50 से ज्यादा लोग चोटिल हुए। पूरे क्षेत्र में कई घंटों तक भगदड़, तनाव और आगजनी से डर का माहौल बना रहा।
इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू—प्रशासन ने संभाला मोर्चा
स्थिति नियंत्रण से बाहर जाते देख जिला प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाए। टिब्बी कस्बे और आसपास के गांवों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं ताकि किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ संदेश का प्रसार न हो। इसके साथ ही इलाके में धारा 144 लागू की गई, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने पर रोक लगाई जा सके। स्कूल-कॉलेज भी सुरक्षा के तहत बंद कर दिए गए। गुरुवार सुबह शहर में स्थिति सामान्य दिखने लगी, लेकिन टिब्बी चौराहे पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। दिलचस्प बात यह रही कि मुख्य चौराहों पर पुलिस की भारी तैनाती नजर नहीं आई, लेकिन प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए था।
ग्रामीणों की चिंताएं बरकरार, पर्यावरण मंजूरी पर सवाल
इस एथेनॉल प्लांट को लेकर विवाद नई बात नहीं है। चंडीगढ़ की ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड का दावा है कि यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को मजबूत करेगा। लेकिन ग्रामीणों और किसान संगठनों का कहना है कि 2022 से पर्यावरण मंजूरी (EC) का आवेदन लंबित होने के बावजूद निर्माण कार्य चल रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। ग्रामीण इस बात को लेकर चिंतित हैं कि प्लांट शुरू होने के बाद क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा और भूजल स्तर पर गंभीर असर पड़ेगा। उनका मानना है कि सरकार और कंपनी ने उन्हें भरोसे में नहीं लिया और न ही किसी पर्यावरणीय रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया। बुधवार की घटना ने इन आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। अब ग्रामीणों की मांग है कि जब तक उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिलता और पर्यावरणीय मंजूरी नहीं दी जाती, तब तक निर्माण कार्य पूरी तरह रोका जाए।
