कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल किसी संस्था या प्रशासन का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। इसलिए हर पहलू की पारदर्शी जांच होना जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी पूरी जानकारी देश के सामने आनी चाहिए। तिवारी ने यह भी कहा कि लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए जांच निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के होनी चाहिए। उनके अनुसार इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए तो लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर भी रखी अपनी बात
महाराष्ट्र सरकार की ओर से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लिए ड्राफ्टिंग कमेटी बनाने की घोषणा पर भी मनीष तिवारी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख है, लेकिन इसकी व्याख्या और लागू करने के तरीके को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उनका कहना था कि यदि कुछ समुदायों, अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक कानूनों का पालन करने वाले समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा जाता है, तो फिर इसे पूरी तरह “यूनिफॉर्म” कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की सहमति जरूरी है, ताकि किसी भी वर्ग में भ्रम या असंतोष की स्थिति पैदा न हो।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान पर क्या बोले?
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में मनीष तिवारी ने कहा कि आतंकवाद को लेकर भारत का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि देश में इस बात पर व्यापक सहमति है कि आतंकवाद और सामान्य रिश्ते एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में पहले भी इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं और भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी नीति साफ शब्दों में रखी है। उनके अनुसार सरकार को राष्ट्रीय सहमति के अनुसार अपनी रणनीति पर आगे बढ़ना चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखना चाहिए।
तीन बड़े मुद्दों पर एक साथ आई प्रतिक्रिया
मनीष तिवारी की ओर से राम मंदिर चढ़ावा विवाद, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि जैसे तीन अहम मुद्दों पर दिए गए बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं। उन्होंने हर मामले में पारदर्शिता, संविधान के सम्मान और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं राम मंदिर से जुड़े कथित गबन के मामले में उन्होंने निष्पक्ष जांच की जरूरत दोहराई, जबकि यूसीसी पर सभी समुदायों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ने की सलाह दी। पाकिस्तान और आतंकवाद के मुद्दे पर भी उन्होंने भारत की सख्त नीति का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में पूरे देश की सोच लगभग एक जैसी है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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