भारत दौरे पर आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में मंगलवार रात राष्ट्रपति भवन में एक भव्य डिनर का आयोजन किया गया। इस डिनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, NSA अजीत डोभाल समेत कई प्रमुख मंत्री और दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस आयोजन को भारत-रूस की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।
डिनर की खास बात यह रही कि विपक्ष की तरफ से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को इस कार्यक्रम के लिए निमंत्रण नहीं दिया गया। इस राजनीतिक पहलू को लेकर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन सरकार की ओर से इस बारे में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
द्विपक्षीय बैठक में कई बड़े समझौतों पर मुहर
पुतिन और पीएम मोदी के बीच हुई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति दर्ज की। बैठक के दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच दशकों पुराने संबंधों को और मजबूत बनाना है।
खास तौर पर रक्षा सहयोग को लेकर भारत और रूस के बीच लंबे समय से बने सहयोगात्मक रिश्तों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं और भारत की भूमिका एक संतुलित शक्ति के रूप में उभर रही है।
पीएम मोदी ने शेयर किया वीडियो
डिनर से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने पुतिन के भारत दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि भारत-रूस संबंध समय की कसौटी पर हमेशा खरे उतरे हैं।
वीडियो में पीएम मोदी यह कहते हुए नजर आते हैं कि दोनों देशों की दोस्ती सिर्फ रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय जुड़ाव और पारस्परिक सम्मान भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भारत और रूस कई नए आयामों में सहयोग करने वाले हैं, जिससे दोनों देशों की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को फायदा पहुंचेगा।
न्योते पर उठे सवाल, राजनीतिक हलचल तेज
डिनर में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को निमंत्रण न भेजे जाने का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक भेदभाव बताया है, जबकि सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि यह एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम है और अतिथियों की सूची सरकार द्वारा तय प्रोटोकॉल के आधार पर बनाई जाती है।
हालांकि इस मामले पर अब तक आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले समय में राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकती है। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक तनाव, ऊर्जा संकट और सुरक्षा के मुद्दे दुनिया भर में चर्चा में हैं, इसलिए भारत-रूस संबंधों में किसी भी तरह की राजनीति स्वाभाविक रूप से सुर्खियां बन जाती है।
Read more-Hardik Pandya ने अपने ही विकेट का किया सेलिब्रेशन, गेंदबाज को लगाया गले, हैरान कर देगी वजह
