रामपुर जिला जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आज़म ख़ान तथा उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्लाह आज़म से मिलने बुधवार को फिर से परिवार के सदस्य पहुंचे। यह दूसरी बार था, जब परिवार ने मुलाकात की कोशिश की। हालांकि, इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सुबह जेल पहुंची आज़म खान की पत्नी डॉ. तंजीन फ़ातिमा, बहन निखत अख़लाक और बड़े बेटे अदीब करीब एक घंटे तक जेल परिसर में इंतज़ार करते रहे। उन्हें भरोसा था कि इस बार बातचीत की इजाज़त मिल जाएगी, पर हालात इसके उलट निकले।
जेल प्रशासन की ओर से परिवार को इंतज़ार करने के लिए कहा गया, लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो मुलाकात तय हुई और न ही अंदर से कोई स्पष्ट सूचना दी गई। परिवार इस उम्मीद में बैठा रहा कि शायद बात आगे बढ़े, परंतु अंत में उन्हें बताया गया कि अब मुलाकात संभव नहीं है।
अब्दुल्लाह ने मिलने से किया इनकार, परिजन हैरान
परिवार की सबसे बड़ी हैरानी तब हुई जब बाहर आते हुए तंजीन फ़ातिमा ने बताया कि जानकारी के अनुसार अब्दुल्लाह आज़म ने मुलाकात से इनकार कर दिया। उनके इस रुख ने परिवार को और ज्यादा परेशान कर दिया, क्योंकि लंबे समय से पिता और बेटे से संपर्क नहीं हो पा रहा है। तंजीन ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि अब्दुल्लाह और आज़म ख़ान दोनों मुलाकात की अनुमति देंगे, लेकिन उनके पास स्पष्ट कारण बताने के लिए कुछ भी नहीं था।
अब्दुल्लाह आज़म के मुलाकात न करने के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। परिवार के करीबी सूत्र बताते हैं कि संभव है कि जेल के भीतर चल रहे हालात, मानसिक तनाव या कानून–व्यवस्था संबंधी कारणों से मुलाकात रोकी गई हो, पर इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया।
आज़म खान से भी नहीं हो सकी बातचीत, परिवार बोला—‘पहले कभी ऐसा नहीं हुआ’
आजम खान के राजनीतिक सफर और उनकी पहचान को देखते हुए परिवार का कहना है कि इतनी लंबी दूरी तय कर आने के बाद उन्हें दूसरे मौके पर भी खाली हाथ लौटना बेहद निराशाजनक है। तंजीन फ़ातिमा ने कहा कि वह लगातार कोशिश कर रही हैं कि अपने पति और बेटे से मिल सकें, लेकिन हालात उनकी उम्मीदों के विपरीत जा रहे हैं।
परिवार के मुताबिक यह पहली बार है जब आज़म खान ने किसी मुलाकात को लेकर कोई संकेत नहीं दिया या बातचीत नहीं की। आमतौर पर वे हमेशा परिवार से बात करने को तैयार रहते थे, लेकिन इस बार जेल प्रशासन ने उन्हें बताया कि मुलाकात नहीं हो पाएगी। इस स्थिति ने परिजनों की चिंता और भी बढ़ा दी है, क्योंकि उन्हें न तो उनकी सेहत की जानकारी मिल पा रही है, न ही उनके मनोस्थिति के बारे में कोई स्पष्ट संदेश।
परिवार को तीसरी कोशिश करनी पड़ सकती है, राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज
रामपुर और प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई नेताओं का कहना है कि परिवार से मिलने की अनुमति न मिलना या अब्दुल्लाह द्वारा खुद मुलाकात ठुकराना किसी बड़े तनाव या दबाव की तरफ इशारा करता है। हालांकि, परिवार ने किसी राजनीतिक कारण को सीधे तौर पर नकार दिया है और कहा है कि उन्हें केवल मुलाकात की चिंता है।
परिवार का कहना है कि वे जल्द ही तीसरी बार फिर से मुलाकात की कोशिश करेंगे। अगर अगली बार भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने पर विचार करेंगे। मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी चिंता जताई है और कहा है कि यह मानवीय मुद्दा है, जिसे सहानुभूति के साथ देखा जाना चाहिए।
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