जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम पत्रकार अराफाज अहमद दैंग का घर प्रशासन द्वारा ढहा दिया गया। जम्मू डिवेलपमेंट अथॉरिटी (JDA) ने यह कार्रवाई की थी, लेकिन इसके पहले किसी भी तरह का नोटिस पत्रकार को नहीं दिया गया। पत्रकार ने इसे तानाशाही करार देते हुए कहा कि उन्हें अपनी संपत्ति बचाने का कोई अवसर नहीं दिया गया। इस घटना के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसबल भी तैनात किया गया था। पत्रकार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार की इस कार्रवाई से परिवार में डर और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं, स्थानीय लोग और अन्य पत्रकार इस कार्रवाई की निंदा कर रहे हैं।
हिंदू पड़ोसी ने बढ़ाया मदद का हाथ
इस कठिन समय में पत्रकार के हिंदू पड़ोसी आगे आए और उन्होंने अराफाज अहमद दैंग को अपना प्लॉट गिफ्ट कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे पत्रकार के लिए घर बनाने में मदद करेंगे। इस कदम को क्षेत्र के लोगों ने भाईचारे और इंसानियत का प्रतीक बताया है।स्थानीय समुदाय में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग कह रहे हैं कि यह उदाहरण दिखाता है कि धर्म और समुदाय की परवाह किए बिना लोग एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
बीजेपी नेता रविंदर रैना ने भी पत्रकार के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लोगों को घर देने पर विश्वास करते हैं, जबकि राज्य सरकार इस तरह की कार्रवाई करके लोगों के घर उजाड़ रही है। रैना ने प्रशासन से कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल जनता और लोकतंत्र में असंतोष पैदा करती है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों और कानून के तहत की गई थी। लेकिन पत्रकार और कई स्थानीय संगठन इसे असंवैधानिक बता रहे हैं। इस विवाद ने जम्मू-कश्मीर में संपत्ति और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस को फिर से उभारा है।
समाज में एक मिसाल और आगे का रास्ता
हिंदू पड़ोसी द्वारा मदद का कदम स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया में छाया हुआ है। यह घटना दिखाती है कि कठिन समय में समाज में भाईचारे की भावना मजबूत रह सकती है। अब पत्रकार अराफाज अहमद दैंग अपने नए प्लॉट पर घर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस घटना ने यह भी साबित किया कि प्रशासन की कठोर कार्रवाई के बावजूद समाज में इंसानियत और सहानुभूति की मिसाल कायम रहती है।
