फिल्म अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह (Sedition) के मामले में सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2021 के किसान आंदोलन से जुड़ा है, जब कंगना ने सोशल मीडिया पर कुछ बयान दिए थे, जिन पर किसानों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे पहले लोअर कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब रिवीजन याचिका स्वीकार कर ली गई है।
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा द्वारा दाखिल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को अहम आदेश दिया है। अब 29 नवंबर को इस मामले की औपचारिक सुनवाई तय की गई है। अधिवक्ता ने बताया कि इससे पहले 6 मई 2025 को लोअर कोर्ट ने वाद खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सेशन कोर्ट में अपील की थी। अदालत ने कहा है कि याचिका में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह मामला पुनः विचार योग्य है।
किसान संगठनों की नाराजगी
कंगना रनौत के खिलाफ फिर से कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बाद कई किसान संगठनों ने इसे न्याय की दिशा में सही कदम बताया है। किसान यूनियन के प्रवक्ताओं ने कहा कि कंगना के उस बयान से देशभर के किसानों का अपमान हुआ था। उन्होंने सोशल मीडिया पर किसानों को “आंदोलनजीवी” और “देशद्रोही मानसिकता वाला” कहकर संबोधित किया था, जिससे विवाद भड़क गया था। हालांकि, कंगना ने बाद में यह कहते हुए सफाई दी थी कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
दरअसल, 2021 के दौरान जब देशभर में किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, तब कंगना रनौत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया था। उस पोस्ट में उन्होंने आंदोलन में शामिल कुछ लोगों पर सवाल उठाए थे और आंदोलन को “राजनीतिक एजेंडा” बताया था। इसके बाद उनके खिलाफ कई जगहों पर शिकायतें दर्ज की गईं। यूपी के अलीगढ़ जिले में अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने राष्ट्रद्रोह की धारा 124A और आईटी एक्ट की कुछ धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की थी।
कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्य और तर्क
अधिवक्ता शर्मा का कहना है कि कंगना रनौत के बयान ने देश की एकता और अखंडता पर सीधा प्रहार किया है। उनके अनुसार, एक सांसद होने के नाते कंगना को संविधान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने कोर्ट में सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो क्लिप और प्रिंट स्क्रीन के रूप में कई साक्ष्य भी पेश किए हैं। वहीं, कंगना की तरफ से वकील ने दलील दी कि उनका बयान किसी समुदाय या वर्ग के खिलाफ नहीं था, बल्कि उन्होंने सिर्फ अपने विचार अभिव्यक्त किए थे।
कंगना रनौत पर चल रहे इस केस ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने इसे बीजेपी की दोहरी नीति का उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि जब कोई आम नागरिक सरकार की आलोचना करता है तो उसे देशद्रोही कहा जाता है, लेकिन अब खुद सत्तारूढ़ दल की सांसद पर ऐसा आरोप लगना गंभीर मामला है। हालांकि बीजेपी नेताओं ने इस पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है और कहा है कि “कानून अपना काम करेगा।”
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
जैसे ही यह खबर फैली, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने लिखा कि “कंगना हमेशा अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं, लेकिन इस बार मामला गंभीर है।” वहीं कुछ लोगों ने कहा कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि कोई भी किसी वर्ग को अपमानित करे।” ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर “#KanganaRanaut” और “#SeditionCase” ट्रेंड करने लगा।
मनोरंजन जगत के कई कलाकारों ने इस मामले पर अपनी राय रखी है। कुछ कलाकारों ने कंगना का समर्थन करते हुए कहा कि “वो अपनी राय रखने के लिए हमेशा स्वतंत्र रही हैं।” वहीं, कुछ ने इसे ‘जवाबदेही’ का मामला बताया। एक वरिष्ठ निर्देशक ने कहा कि “कला और राजनीति दोनों में जब जिम्मेदारी आती है, तो शब्दों का चयन बहुत जरूरी होता है।”
29 नवंबर की सुनवाई पर सबकी निगाहें
अब सभी की निगाहें 29 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि कोर्ट को साक्ष्य पर्याप्त लगते हैं, तो कंगना रनौत पर औपचारिक रूप से राष्ट्रद्रोह की धाराओं के तहत मुकदमा चल सकता है। यह न केवल उनके राजनीतिक करियर, बल्कि उनकी सार्वजनिक छवि पर भी गहरा असर डाल सकता है। वहीं, उनकी लीगल टीम का कहना है कि वे इस मामले में जल्द ही उच्च न्यायालय का रुख कर सकती हैं।
फिलहाल कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार है। कंगना रनौत की तरफ से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मामला आगे बढ़ता है, तो यह बॉलीवुड और राजनीति दोनों के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है। जनता के बीच अब यही सवाल गूंज रहा है — क्या कंगना अपने बयान की कीमत चुकाएंगी या एक बार फिर कानून से राहत पा जाएंगी?
