बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में गुरुवार को मतदाताओं ने लोकतंत्र का असली जश्न मनाया। 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर कुल 64.66 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो कि 1951 के बाद किसी पहले चरण में सबसे अधिक है। इस ऐतिहासिक मतदान ने 2020 के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है। उस वक्त इन सीटों पर केवल 55.81 फीसदी वोटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिहार के मतदाताओं को “रिकॉर्डतोड़ सहभागिता” के लिए बधाई दी और कहा कि यह जनता की लोकतंत्र के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है।
बिहार की सड़कों से लेकर बूथों तक, हर जगह सिर्फ एक ही माहौल था — वोटिंग को लेकर उत्साह और जिम्मेदारी का अहसास। महिलाएं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। ईवीएम में अब कुल 1314 उम्मीदवारों की किस्मत बंद हो चुकी है। इन सीटों का नतीजा तय करेगा कि सत्ता का समीकरण किस ओर झुकेगा — एनडीए या महागठबंधन की तरफ।
बेगूसराय, मधेपुरा और खगड़िया में मतदाताओं का जोश चरम पर
बिहार का औसत मतदान 64.66 फीसदी भले रहा, लेकिन कई जिलों में मतदाताओं ने इस औसत को पीछे छोड़ दिया। बेगूसराय जिले में 67.32 फीसदी वोटिंग हुई, जो राज्य के टॉप जिलों में शामिल रहा। यहां की तेघड़ा विधानसभा सीट ने सबसे अधिक 69.75 फीसदी मतदान के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। चेरिया-बरियारपुर (68.83%), बछवाड़ा (69.67%), मटिहानी (68.60%) और बखरी (66.88%) जैसे इलाकों ने भी लोकतंत्र की नब्ज़ को और मजबूत किया।
वहीं मधेपुरा जिले में औसतन 65.74 फीसदी मतदान हुआ। यहां आलमनगर सीट ने 66.56 फीसदी वोटिंग के साथ बाज़ी मारी। बिहारीगंज (64.90%), सिंहेश्वर (66.32%) और मधेपुरा (65.12%) में भी मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर वोट डाले।
खगड़िया जिले में 60.65 फीसदी मतदान हुआ। यहां अलौली विधानसभा सीट ने सबसे अधिक 66 फीसदी वोटिंग के साथ मतदाताओं की सक्रियता का संदेश दिया, जबकि बेलदौर और परबत्ता जैसे इलाकों में यह आंकड़ा क्रमशः 56.30% और 56.93% रहा।
भोजपुर में थोड़ा ठंडा जोश, पर वोटर्स ने निभाई जिम्मेदारी
जहां कई जिलों में वोटिंग ने नए कीर्तिमान रचे, वहीं भोजपुर जिले में मतदान का प्रतिशत थोड़ा कम रहा। जिले में औसतन 53.25 फीसदी मतदान हुआ। हालांकि, यहां भी मतदाताओं ने लोकतंत्र का सम्मान निभाया। संदेश सीट ने 58.01% वोटिंग के साथ जिले में सबसे ऊंचा आंकड़ा दर्ज किया। बड़हरा (56.95%), जगदीशपुर (54.83%), और शाहपुर (55.07%) जैसी सीटों पर भी लोगों ने लोकतंत्र की ताकत का अहसास कराया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मतदान प्रतिशत में हुई बड़ी बढ़ोतरी का असर नतीजों पर भी पड़ सकता है। अधिक वोटिंग का मतलब होता है – जनता में बदलाव की चाह। 1951 के बाद पहली बार बिहार ने इतना बड़ा मतदान देखा है, जो आने वाले परिणामों को और दिलचस्प बना देगा। अब सभी की निगाहें 19 नवंबर पर हैं, जब पहले चरण के नतीजों की तस्वीर साफ होगी।
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