उड़ते हुए सांप किसी काल्पनिक कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि सच्चाई हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में “क्रायसोपेलिया” (Chrysopelea) नामक सांपों की प्रजाति पाई जाती है, जो पेड़ों से हवा में ग्लाइड कर सकती है। ये सांप भारत, थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया के वर्षावनों में पाए जाते हैं। इनकी उड़ान देखने पर कोई भी चकित रह जाता है — क्योंकि बिना पंखों के ये हवा में 25 मीटर तक का फासला तय कर लेते हैं।
कैसे करते हैं उड़ान: वैज्ञानिकों ने बताया राज
वैज्ञानिकों के अनुसार उड़ने वाले सांप वास्तव में “उड़ते” नहीं, बल्कि ग्लाइडिंग मूवमेंट करते हैं। जब ये सांप किसी ऊंचे पेड़ से छलांग लगाते हैं, तो अपने शरीर को फ्लैट आकार में फैला लेते हैं। इससे उनका शरीर एक “पंख जैसी सतह” बना लेता है, जो हवा को काटने के बजाय उसे सहारा देती है। इसी संतुलन के जरिए सांप 15 से 25 मीटर ऊंचाई से ग्लाइड करते हैं और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंच जाते हैं।
इनका शरीर पतला, लचीला और हल्का होता है। वे अपने शरीर को ‘S’ आकार में हिलाते हुए उड़ान के दौरान दिशा भी बदल सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि सांपों की यह क्षमता एरोडायनामिक्स का बेहतरीन उदाहरण है।
सुरक्षा और शिकार: उड़ान का असली मकसद
अब सवाल उठता है — आखिर ये उड़ान भरते क्यों हैं? दरअसल, उड़ान इन सांपों के लिए बचाव और शिकार, दोनों का हथियार है। ऊंचे पेड़ों से छलांग लगाकर वे शिकारी जानवरों से बच निकलते हैं। वहीं, किसी छोटे पक्षी या छिपकली पर झपटने के लिए ये अचानक ऊपर से आक्रमण करते हैं। इससे उनके शिकार को भागने का मौका नहीं मिलता।
इसके अलावा, उड़ान इनके ऊर्जा-व्यय को भी कम करती है। पेड़ों पर बार-बार चढ़ने की बजाय वे हवा के जरिए दूरी तय कर लेते हैं, जिससे जंगल में घूमना आसान हो जाता है।
कहां देख सकते हैं ये उड़ने वाले सांप
अगर आप इन दुर्लभ जीवों को देखना चाहते हैं, तो आपको भारत के पश्चिमी घाट, म्यांमार के जंगलों या बोर्नियो और थाईलैंड के रेनफॉरेस्ट में जाना होगा। खासकर मानसून के मौसम में जब पेड़ों पर नमी और हरियाली बढ़ती है, तब ये सांप ज्यादा सक्रिय होते हैं।
हालांकि, इंसानों के लिए ये खतरा नहीं हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार उड़ने वाले ये सांप कम जहरीले होते हैं और आमतौर पर मनुष्यों से दूरी बनाए रखते हैं।
क्या भविष्य में इंसान भी सीख सकता है उड़ान का ये रहस्य?
कई वैज्ञानिक इन सांपों की उड़ान तकनीक को समझने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ड्रोन और रोबोटिक्स में इसका उपयोग किया जा सके। सांपों के शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी और उनके हवा में संतुलन बनाए रखने की क्षमता भविष्य के “एरो-बॉट्स” के डिजाइन में मदद कर सकती है।
उड़ने वाले सांप आज भी प्रकृति का ऐसा रहस्य हैं, जो दिखाते हैं कि धरती पर जीवन कितना अद्भुत और अप्रत्याशित हो सकता है।
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