बिहार विधानसभा चुनाव इस बार बेहद रोचक और असामान्य रहा। दो चरणों में हुए इस चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी उम्मीद से कहीं अधिक देखने को मिली। सुबह से लेकर शाम तक मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें दिखाई देती रहीं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, हर जगह मतदान के प्रति अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। मतदाताओं का यह जोश साफ संकेत देता है कि इस बार उनका मूड सामान्य से अलग है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो परिणामों में बड़ा फर्क पैदा कर सकती है। रोजगार, शिक्षा, सड़क-स्वास्थ्य, सुरक्षा और महंगाई जैसे मुद्दे मतदाताओं की सोच को गहराई से प्रभावित करते दिखे।
आज होने वाली मतगणना यह बताएगी कि जनता ने अपने मन में किस बदलाव की उम्मीद रखी है स्थिरता? या सत्ता परिवर्तन?
एनडीए बनाम महागठबंधन
2025 के चुनाव में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन के बीच रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के साथ मिलकर एनडीए इस चुनाव में अपनी सरकार को दोबारा कायम रखने के प्रयास में था। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव की अगुवाई वाला महागठबंधन युवा नेतृत्व का चेहरा बनकर जनता के बीच गया।
एनडीए ने विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था और स्थिर प्रशासन को मुख्य मुद्दा बताया। वहीं महागठबंधन ने बेरोजगारी, युवाओं के पलायन, बढ़ती महँगाई और किसानों के सवालों को प्रमुखता से उठाया। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली, जिसने माहौल को गर्म बनाए रखा। इस बार एक और महत्वपूर्ण पहलू थाकुछ छोटे दलों और नए राजनीतिक चेहरों का उभरना। जन सुराज जैसे दलों ने कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बनाया, जिससे बड़ी पार्टियों का गणित प्रभावित हो सकता है। यदि वोटों में मामूली अंतर रहा तो कई सीटों पर छोटे दल “किंगमेकर” की भूमिका में आ सकते हैं।
मतगणना केंद्र सज-धज कर तैयार, सुरक्षा में नहीं कोई चूक
आज सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। सभी काउंटिंग केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। पुलिस बल, केंद्रीय सुरक्षा कर्मी और वीडियो निगरानी के साथ पूरे माहौल को नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है। सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती होगी। उसके बाद ईवीएम मशीनों के परिणाम आने शुरू होंगे। हर राउंड के बाद अपडेट जारी किया जाएगा, जिससे चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती जाएगी।
राजनीतिक दलों के एजेंट और पर्यवेक्षक भी शुरुआत से अंत तक मौजूद रहेंगे ताकि कोई भ्रम या विवाद की स्थिति न बने। चुनाव आयोग इस बार विशेष रूप से सतर्क है, क्योंकि कई सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा रहने के संकेत मिले हैं। सुबह से ही पटना सहित कई जिलों में राजनीतिक दलों के कार्यालयों और कार्यकर्ताओं में हलचल शुरू हो जाएगी। लोग टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर लगातार नजरें टिकाए रखेंगे।
क्या मिलेगा स्पष्ट बहुमत या पैदा होगा हंग असेंबली का रोमांच?
इस चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलेगा या राज्य में एक बार फिर ‘हंग असेंबली’ की स्थिति बन जाएगी। मतदान के पैटर्न और चुनावी माहौल को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि इस बार कई जगह नतीजे बेहद करीबी हो सकते हैं।
यदि किसी भी गठबंधन की सीटें बहुमत से दूर रहती हैं, तो छोटे दलों और निर्दलीयों की भूमिका अहम हो जाएगी। ऐसे में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। राजनीति में जोड़-तोड़, नए गठबंधन और अप्रत्याशित फैसले भी सामने आ सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने राजनीतिक उतार-चढ़ाव का लंबा दौर देखा है। गठबंधन बदलने से लेकर सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व की खींचतान तक राज्य की राजनीति हमेशा ही जीवंत रही है। इसलिए आज के नतीजे सिर्फ चुनाव परिणाम नहीं होंगे, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति दिशा भी तय करेंगे। इस चुनाव में सामाजिक समीकरणों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। युवा मतदाताओं की बढ़ी संख्या ने इस बार निर्णायक मतदान किया है। रोजगार और सरकारी अवसर उनकी प्रमुख चिंताओं में शामिल रहे। ग्रामीण गरीब वर्ग, किसान और मजदूर भी इस बार चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे। सरकार की योजनाएँ और विपक्ष के वादे, दोनों ने इन्हीं वर्गों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। आज जब रिजल्ट सामने आएंगे, तो यह साफ होगा कि किस पार्टी ने किस वर्ग का विश्वास जीता है।
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