लोकसभा के सत्र के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चुनाव सुधारों पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। जैसे ही शाह ने घुसपैठियों और पिछले प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल को लेकर अपने आरोपों का सिलसिला शुरू किया, कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद खड़े हो गए और नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए। यह वॉकआउट इतने अचानक हुआ कि सदन में मौजूद कई सांसद भी कुछ देर तक समझ नहीं पाए कि आखिर विपक्ष किन बातों से नाराज़ होकर चला गया।
घुसपैठियों पर सख्त रुख, शाह बोले—200 बार बहिष्कार कर लो, वोट नहीं मिलेगा
अमित शाह ने अपने भाषण में साफ कहा कि चाहे विपक्ष कितनी भी बार बॉयकॉट कर ले, लेकिन भारत में एक भी घुसपैठिए को वोट डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि घुसपैठ रोकना सरकार की प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। शाह ने अपने संबोधन में जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक के कार्यकाल का जिक्र किया। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि घुसपैठ का मामला नया नहीं, बल्कि दशकों पुरानी चुनौती है।
विपक्ष क्यों हुआ नाराज़?
विपक्ष का आरोप है कि अमित शाह हर मुद्दे पर गैरज़रूरी रूप से पुरानी सरकारों को घसीटते हैं और बहस को भटकाते हैं। जैसे ही शाह ने पिछली कांग्रेस सरकारों पर आरोप लगाने शुरू किए, विपक्षी सांसदों ने इसे राजनीतिक हमला बताते हुए विरोध जताया और वॉकआउट कर दिया। हालांकि शाह ने कहा कि अगर वे नेहरू, इंदिरा या राजीव गांधी पर आरोप लगाते समय वॉकआउट करते तो यह तर्कसंगत होता, लेकिन घुसपैठियों के मुद्दे पर बाहर जाना बताता है कि विपक्ष जवाब देने से बच रहा है।
बीजेपी का पलटवार—‘डरो मत, भाग जाओ’ पोस्ट से बढ़ी गरमी
विपक्ष के वॉकआउट के कुछ ही समय बाद बीजेपी ने सोशल मीडिया पर हमला बोल दिया। बीजेपी प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा—“डरो मत, भाग जाओ।” यह पोस्ट तेजी से वायरल हुआ और दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। भाजपा का कहना है कि विपक्ष के पास बहस के मुद्दे खत्म हो चुके हैं, इसलिए वे सदन से भागते हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे बयान देती है।
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