उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव पर बड़ी कार्रवाई की गई। फिरोजाबाद जिले की जसराना विधानसभा सीट से विधायक सचिन यादव (Sachin Yadav) को सदन की कार्यवाही के दौरान नियमों के उल्लंघन के आरोप में पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। विधानसभा में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर दिखाकर विरोध जताने की कोशिश की थी। इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और प्रस्ताव पारित होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। निलंबन के कारण अब वह सत्र की बची हुई कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। इस फैसले के बाद विधानसभा परिसर में राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
विधानसभा सचिवालय ने जारी किया आदेश
विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि सदन ने 4 अगस्त 2026 की बैठक में प्रस्ताव पारित कर सचिन यादव (Sachin Yadav) को उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमावली, 2023 के नियम 299(1) के तहत निलंबित किया है। आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें विधानसभा परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही वह सदन और उसकी किसी भी समिति की बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे। विधानसभा सचिवालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सदन की कार्यवाही और नियमों को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। आदेश जारी होने के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं।
निलंबन के बाद धरने पर बैठे Sachin Yadav
निलंबन की कार्रवाई के बाद सचिन यादव (Sachin Yadav) विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि वह एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया गया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि वह कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर सदन में चर्चा की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की तस्वीर दिखाने का उद्देश्य पहले दिए गए बयानों की याद दिलाना था। सचिन यादव के अनुसार, इस मामले में जांच के बाद सच्चाई सामने आने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
सियासी बयानबाजी तेज, आगे भी रह सकता है विवाद
सपा विधायक के निलंबन के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी इस कार्रवाई को विपक्ष की आवाज दबाने वाला कदम बता रही है, जबकि सरकार और विधानसभा की ओर से इसे नियमों के अनुसार उठाया गया फैसला माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर आगे भी बहस देखने को मिल सकती है। फिलहाल सचिन यादव (Sachin Yadav) पूरे सत्र के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर रहेंगे और विधानसभा परिसर में भी प्रवेश नहीं कर सकेंगे। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
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