पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में छिड़े महायुद्ध की आग अब भारत की घरेलू राजनीति को भी गरमाने लगी है। केंद्र सरकार द्वारा बुधवार (25 मार्च 2026) को बुलाई गई बेहद महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक (All Party Meeting) से पहले सियासत में उबाल आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस बैठक में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने न केवल इस बैठक से दूरी बनाई है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का आरोप है कि भारत की विदेश नीति अब देश के हित में नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के ‘निजी एजेंडे’ और विदेशी ताकतों के इशारे पर चल रही है। इस बयान ने संसद से लेकर सड़क तक एक नई बहस छेड़ दी है।
केरल का कार्यक्रम या सरकार से नाराजगी?
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सर्वदलीय बैठक में शामिल न होने का प्राथमिक कारण अपने पूर्व निर्धारित केरल दौरे को बताया है। उन्होंने कहा कि केरल में उनके पहले से तय कार्यक्रम हैं, जिसके चलते वह दिल्ली में होने वाली इस चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। हालांकि, उनके बयान के तेवर बताते हैं कि यह दूरी सिर्फ कार्यक्रमों के टकराव की वजह से नहीं है। राहुल गांधी ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, “आपने पूरे लोकतांत्रिक ढांचे को ही उड़ा दिया है। अब आप उसे अचानक ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, जो संभव नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संवाद के स्ट्रक्चर में ऐसी बुनियादी गलतियां कर दी हैं जिन्हें सुधारने में अब बहुत वक्त लगेगा और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह मुमकिन नहीं दिखता।
#WATCH | Delhi | Congress MP and Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, “I would not be able to attend because I have a program in Kerala. All-party meeting should take place, but a structural blunder has been made… And this cannot be fixed, especially the Prime Minister cannot. He… https://t.co/gAIBnSG77B pic.twitter.com/NuXDdpMuIN
— ANI (@ANI) March 24, 2026
“फॉरेन पॉलिसी अब एक यूनिवर्सल मजाक बन गई है”
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति अब एक ‘यूनिवर्सल मजाक’ बनकर रह गई है। कांग्रेस सांसद के मुताबिक, “जो अमेरिका और इजरायल कहेगा, प्रधानमंत्री मोदी वही करेंगे। वह हिंदुस्तान के किसानों या आम जनता के हित में फैसले नहीं लेंगे।” राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (दबाव में) हैं, इसलिए देश की स्थिति भी कमजोर हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार के इन फैसलों का खामियाजा आने वाले समय में देश की जनता को एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और किल्लत के रूप में भुगतना पड़ेगा। उनके अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट का असर अभी सिर्फ शुरू हुआ है और आने वाले दिनों में चुनौतियां और बढ़ेंगी।
राज्यसभा में पीएम मोदी का जवाब
दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में देश की स्थिति स्पष्ट की थी। पीएम ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से वह पश्चिम एशिया के लगभग सभी प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की बातचीत कर चुके हैं। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि भारत लगातार ईरान, इजरायल और अमेरिका के संपर्क में है और हमारा एकमात्र लक्ष्य संवाद व कूटनीति के जरिए शांति बहाल करना है। पीएम ने व्यापारिक मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को खुला रखने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित न हो। सरकार का पक्ष है कि वे सभी पक्षों को साथ लेकर चल रहे हैं और सर्वदलीय बैठक इसी पारदर्शी प्रक्रिया का एक हिस्सा है ताकि विपक्ष को भी भरोसे में लिया जा सके।
विपक्ष के सवालों के बीच फंसी सरकार की कूटनीति
विपक्ष और विशेष रूप से कांग्रेस का मानना है कि सरकार मिडिल ईस्ट संकट के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को कम करके आंक रही है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का कहना है कि भारत की कोई स्पष्ट पोजीशन (स्टैंड) नहीं रह गई है और लोग असमंजस में हैं। जहाँ सरकार इसे कूटनीतिक जीत बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘निजी पॉलिसी’ करार दे रहा है। बुधवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की ओर से कौन प्रतिनिधित्व करेगा और अन्य विपक्षी दल क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या देश को आने वाले संभावित आर्थिक संकट से बचाने के लिए कोई ठोस साझा रणनीति बन पाती है या नहीं।
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