कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में पेश किया गया ‘PM-CM को जेल भेजने वाला बिल’ लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाला कदम है। खरगे ने दावा किया कि इस बिल को विपक्षी दलों को डराने और उनकी एकजुटता को तोड़ने के लिए जल्दबाजी में लाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह मुद्दा सीधे-सीधे संघीय ढांचे और संविधान से जुड़ा है, तो इसे विपक्ष और सभी दलों की सहमति के बिना क्यों पेश किया गया। उनके अनुसार, सरकार जानबूझकर इस बिल को उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
सहमति से बिल लाने की मांग
खरगे ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि कांग्रेस और गठबंधन सहयोगी दल लोकतांत्रिक ढांचे से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में इस बिल को लागू करना चाहती है तो उसे सभी दलों से चर्चा करनी चाहिए थी। लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि सरकार ने विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस बिल का सहारा लिया है। उन्होंने इसे सीधे-सीधे ‘राजनीतिक डराने-धमकाने की रणनीति’ बताया। खरगे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा कानून विपक्ष को कमजोर करने और नेताओं को जेल भेजने का औजार नहीं बन सकता।
गठबंधन पर असर की चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि इस बिल के जरिए सरकार का असली मकसद गठबंधन की एकजुटता को तोड़ना है। उपराष्ट्रपति चुनाव नजदीक है और ऐसे में विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए सत्ता पक्ष हर संभव हथकंडा अपना रहा है। खरगे ने साफ कहा कि कांग्रेस अपने सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी हालत में लोकतंत्र पर हमले को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार विपक्ष को दबाने की कोशिश करती रही, तो देशभर में जनआंदोलन खड़ा होगा।
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