नेपाल की राजनीति में इस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए संसदीय चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party – RSP) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 165 सीटों के रुझान सामने आए हैं, जिनमें आरएसपी ने मजबूत प्रदर्शन किया है। पार्टी ने करीब 55 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि लगभग 66 सीटों पर वह बढ़त बनाए हुए है। इन आंकड़ों को देखते हुए नेपाल में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पांच मार्च को नेपाल में हुए आम चुनाव में लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक लगभग 58 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतगणना कई चरणों में हो रही है और इसके पूरी तरह समाप्त होने में अभी कुछ दिन लग सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान बरकरार रहते हैं तो बालेन शाह की पार्टी नेपाल की राजनीति में एक नई ताकत बनकर उभर सकती है। यही वजह है कि पूरे दक्षिण एशिया में इन चुनाव परिणामों पर खास नजर रखी जा रही है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने दी बधाई, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सराहना
नेपाल में चुनाव परिणामों के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए नेपाल के लोगों और वहां की सरकार को चुनाव के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए बधाई दी। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि नेपाल के नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकारों का उत्साह के साथ इस्तेमाल करते देखना बेहद सुखद है। उन्होंने इसे नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं और भारत हमेशा नेपाल के लोगों के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार बनने के बाद दोनों देश मिलकर शांति, विकास और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। भारत और नेपाल के रिश्ते सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत गहरे हैं, इसलिए नेपाल की राजनीतिक स्थिति का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है। पीएम मोदी का यह संदेश दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों को और स्पष्ट करता है।
चुनावी व्यवस्था और सीटों का गणित समझना जरूरी
नेपाल की चुनावी प्रणाली भारत से थोड़ी अलग है और इसमें मिश्रित व्यवस्था अपनाई जाती है। यहां संसद के सदस्यों का चुनाव दो अलग-अलग तरीकों से होता है। पहला तरीका प्रत्यक्ष चुनाव का है, जिसमें मतदाता सीधे किसी उम्मीदवार को वोट देते हैं। दूसरा तरीका पार्टी वोट प्रतिशत के आधार पर सीटों के वितरण का है। इस प्रणाली के तहत राजनीतिक दलों को कुल वोट प्रतिशत के अनुसार संसद में सीटें दी जाती हैं।
नेपाल की संसद में कुल सीटों का एक हिस्सा इसी अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत तय होता है। मौजूदा चुनाव में लगभग 110 सीटें पार्टियों को उनके वोट प्रतिशत के आधार पर मिलेंगी। इस व्यवस्था में मतदाता किसी खास उम्मीदवार के बजाय सीधे पार्टी को वोट देता है। फिर चुनाव आयोग कुल वोट प्रतिशत के आधार पर सीटों का बंटवारा करता है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार बालेन शाह की पार्टी को अब तक लगभग 54.8 प्रतिशत वोट मिल चुके हैं, जो उनके लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त मानी जा रही है। इसी वजह से आरएसपी को सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में देखा जा रहा है।
कौन हैं बालेन शाह, जिनकी चर्चा पूरे नेपाल में
इन चुनाव परिणामों के बाद जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है बालेन शाह। वह नेपाल की राजधानी काठमांडू के पूर्व मेयर रह चुके हैं और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। उनका जन्म 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में हुआ था। उन्होंने भारत के नागपुर स्थित वीएनआईटी (VNIT) से अपनी पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले बालेन शाह एक लोकप्रिय हिप-हॉप और रैप म्यूजिक कलाकार भी रहे हैं।
संगीत के जरिए उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया, जिससे युवाओं के बीच उनकी पहचान तेजी से बनी। वर्ष 2022 में वह काठमांडू के पहले स्वतंत्र मेयर बने थे और उसी समय से उन्हें एक अलग तरह के नेता के रूप में देखा जाने लगा। साफ-सुथरी राजनीति और युवाओं से जुड़ाव उनकी खास पहचान बन गई। अब उनकी पार्टी के मजबूत प्रदर्शन ने नेपाल की राजनीति में एक नई दिशा की संभावना पैदा कर दी है।
फिलहाल पूरे देश की नजरें मतगणना के अंतिम परिणामों पर टिकी हैं। यदि वर्तमान रुझान अंतिम परिणामों में भी कायम रहते हैं तो नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह चुनाव न केवल नई सरकार तय करेगा बल्कि आने वाले वर्षों में नेपाल की राजनीतिक दिशा और नीतियों को भी प्रभावित करेगा।

