महाराष्ट्र के लातूर में आयोजित एक जनसभा के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। ओवैसी ने अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए बीजेपी नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेता ट्रंप का नाम सुनते ही ठंडे पड़ जाते हैं। ओवैसी ने मंच से कहा, “मैं बीजेपी के लोगों से पूछना चाहता हूं कि आप ट्रंप से इतना डरते क्यों हो? ट्रंप का नाम आते ही आपकी आवाज क्यों बंद हो जाती है?”
ओवैसी ने आगे कहा कि ट्रंप खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हैं, उन्हें “अच्छा आदमी” बताते हैं, फिर भी जब ट्रंप भारत या भारत सरकार को लेकर कोई विवादित बयान देते हैं तो बीजेपी पूरी तरह खामोश हो जाती है। उन्होंने इसे देश के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि 133 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री होने के बावजूद अगर सरकार चुप रहती है तो यह चिंता की बात है।
‘24 घंटे बीत गए, लेकिन बीजेपी अब भी चुप’
अपने भाषण को और तीखा करते हुए ओवैसी ने कहा कि ट्रंप के हालिया बयान को 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन बीजेपी और केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश की गरिमा और सम्मान कोई मायने नहीं रखते? ओवैसी ने कहा, “दुनिया में कोई भी हमारे देश का अपमान नहीं कर सकता। अगर ऐसा होता है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह खुलकर बोले।”
ओवैसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं की राजनीति केवल हिंदू-मुस्लिम, लव जिहाद और बांग्लादेशी जैसे मुद्दों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि किसानों की मौत, युवाओं की बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी चुप्पी साध लेती है। ओवैसी के मुताबिक, सरकार के पास इन गंभीर मुद्दों पर जवाब देने का न तो साहस है और न ही इच्छाशक्ति।
मादुरो की गिरफ्तारी का जिक्र, मोदी सरकार पर तंज
ओवैसी ने अपने भाषण में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह अमेरिकी सेना मादुरो को उनके देश से पकड़कर अमेरिका ले गई, वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा उदाहरण है। ओवैसी ने इस घटना को भारत-पाकिस्तान संबंधों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा, “अगर डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उनके देश से अगवा कर सकते हैं, तो भारत की सरकार पाकिस्तान जाकर 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड को भारत क्यों नहीं ला सकती?” ओवैसी ने इसे सरकार की कथनी और करनी के बीच का फर्क बताया। उनके मुताबिक, सरकार केवल बड़े-बड़े भाषण देती है, लेकिन जब ठोस कदम उठाने की बारी आती है तो पीछे हट जाती है।
चुनावी माहौल में ओवैसी का हमला, राजनीतिक संदेश साफ
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। उनके इस हमले को आगामी चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। ओवैसी ने अपने भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार केवल भावनात्मक मुद्दों पर राजनीति कर रही है, जबकि देश के असली मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार सच में मजबूत है तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसी मजबूती के साथ बोलना चाहिए। ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बयान पर सियासी घमासान और तेज हो सकता है।
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