Sunday, February 1, 2026
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वफादारी टूट गई: AAP नेता ने थामा BJP का हाथ, पार्टी बदलते ही अरविंद केजरीवाल को दी नसीहत

AAP के वरिष्ठ नेता राजेश गुप्ता ने दिल्ली में BJP में शामिल होकर अरविंद केजरीवाल को नसीहत दी। जानें उनके आरोप, टिकट विवाद और राजनीतिक असर।

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दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) उपचुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दो बार विधायक रह चुके राजेश गुप्ता ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले ली। उन्होंने यह कदम दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा की मौजूदगी में उठाया। राजेश गुप्ता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कर्नाटक इकाई के प्रभारी भी रह चुके हैं। भाजपा में शामिल होते समय राजेश गुप्ता भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू छलक आए, क्योंकि उन्होंने आप में बिताए अपने अनुभव और अरविंद केजरीवाल के साथ अपने रिश्ते को याद किया।

कार्यकर्ताओं के साथ ‘उपयोग करो और छोड़ दो’ वाला व्यवहार

भाजपा में शामिल होते हुए राजेश गुप्ता ने AAP और उसके नेता अरविंद केजरीवाल पर कड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी और नेताओं का पतन कार्यकर्ताओं के साथ “उपयोग करो और छोड़ दो” वाले व्यवहार के कारण हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि जब AAP का गठन हुआ था, तो कई जाने-माने लोग खुशी-खुशी अरविंद केजरीवाल का साथ देने आए थे, लेकिन धीरे-धीरे सभी ने उन्हें छोड़ दिया। राजेश गुप्ता ने यह स्वीकार किया कि आज दुर्भाग्यवश वह भी उन लोगों की सूची में शामिल हो गए हैं।

अशोक विहार वार्ड का टिकट विवाद

राजेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि अशोक विहार वार्ड में AAP ने उपचुनाव के लिए एक ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया है, जिसे पार्टी ने पहले ही नोटिस जारी किया था। उन्होंने कहा कि पार्टी के संयोजक ने उनसे न तो कोई बातचीत की और न ही मिलने का समय दिया। इसी दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल को भी सीधे तौर पर नसीहत दी और कहा कि उन्हें यह समझना होगा कि लोग उन्हें क्यों छोड़ रहे हैं। राजेश गुप्ता ने यह भी बताया कि उन्होंने हमेशा AAP के लिए संघर्ष किया, यहां तक कि टीवी पर भी पार्टी के लिए लड़ाई लड़ी।

दिल्ली की राजनीतिक तस्वीर पर असर

राजेश गुप्ता का BJP में शामिल होना दिल्ली की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव ला सकता है। एमसीडी उपचुनाव से पहले यह कदम AAP के लिए चिंता का विषय हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे वरिष्ठ नेताओं का पार्टी छोड़ना जनता के मन में सवाल खड़े कर सकता है और AAP की छवि पर असर डाल सकता है। वहीं भाजपा के लिए यह कदम पार्टी को मजबूत बनाने और आगामी चुनावों में स्थिति सुधारने में मददगार साबित हो सकता है।

 

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