दिल्ली के केंद्र में स्थित सिंधु अपार्टमेंट, जो सांसदों के आवास के रूप में जाना जाता है, बुधवार शाम अचानक आग की लपटों में घिर गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग ग्राउंड फ्लोर पर स्थित बिजली बोर्ड में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। सौभाग्य से, इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन कुछ वाहनों और दीवारों को नुकसान जरूर पहुंचा है।
बिजली बोर्ड में शॉर्ट सर्किट से मचा हड़कंप
स्थानीय निवासियों के मुताबिक शाम करीब 6:45 बजे अचानक अपार्टमेंट के नीचे से धुआं उठता दिखा। कुछ ही मिनटों में आग तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सांसदों के परिवार और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत इमारत खाली की और अग्निशमन विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही तीन फायर टेंडर मौके पर पहुंचे और करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।
फायर डिपार्टमेंट की त्वरित कार्रवाई से टला बड़ा हादसा
दमकल अधिकारियों ने बताया कि आग की वजह इलेक्ट्रिक पैनल बोर्ड में हुए शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा है। यदि समय पर सूचना नहीं दी जाती, तो आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था। आग बुझाने के दौरान कुछ कर्मचारियों को हल्की सांस लेने में परेशानी हुई, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। मौके पर मौजूद बीएसईएस (BSES) की टीम ने तुरंत बिजली सप्लाई बंद कर दी ताकि हादसा बढ़ने से रोका जा सके।
सांसदों ने जताई चिंता, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद सांसदों और उनके परिवारों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कुछ सांसदों ने कहा कि अपार्टमेंट में लगे बिजली बोर्ड पुराने हो चुके हैं और समय-समय पर उनकी मेंटेनेंस नहीं की जाती। उन्होंने सरकार और हाउसिंग विभाग से मांग की है कि ऐसे सरकारी आवासों में अग्निशमन सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। दिल्ली पुलिस ने आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। वहीं BSES की तकनीकी टीम भी घटनास्थल पर मौजूद है और शॉर्ट सर्किट के असल कारणों की जांच कर रही है।
दिल्ली में सरकारी इमारतों की सुरक्षा पर फिर सवाल
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब दिल्ली में लगातार सरकारी भवनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ महीने पहले एमपी फ्लैट्स और अशोका रोड स्थित सरकारी आवासों में भी इसी तरह के हादसे हुए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इन इमारतों की वायरिंग सिस्टम बेहद पुरानी हो चुकी है, जिससे इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहता है।
Read more-टीम इंडिया को झटका: पहले टेस्ट से बाहर हुआ स्टार ऑलराउंडर, शुभमन गिल पर बढ़ा दबाव
