महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दिए गए अपने बयान पर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है। बुधवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने दो टूक कहा कि उन्होंने जो कहा, उसमें उन्हें कोई गलती नजर नहीं आती और इसलिए खेद जताने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों का मानना है कि इस बयान ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दों को सीधे तौर पर छू लिया है। वहीं, कांग्रेस के भीतर भी इसे लेकर असहजता देखी जा रही है, क्योंकि बयान ऐसे समय आया है जब संसद सत्र चल रहा है और सरकार पहले से ही विपक्ष को घेरने के मूड में है।
ऑपरेशन सिंदूर पर क्या कहा था चव्हाण ने
विवाद की जड़ उस बयान में है, जो पृथ्वीराज चव्हाण ने हाल ही में पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया था। उन्होंने दावा किया था कि मई महीने में पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य टकराव, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कहा गया, उसके पहले ही दिन भारत को नुकसान उठाना पड़ा था। चव्हाण का कहना था कि उस दौरान भारतीय सैन्य विमानों को मार गिराया गया और इसके बाद भारतीय वायु सेना को ग्राउंडेड होना पड़ा। उन्होंने इसे भारत के लिए रणनीतिक असफलता करार दिया। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। कई रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी इस दावे पर सवाल उठाए और इसे तथ्यों से परे बताया।
BJP का पलटवार और संसद में रणनीति
चव्हाण के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। BJP नेताओं का कहना है कि कांग्रेस का “DNA” ही सेना विरोधी रहा है और यह बयान उसी सोच को उजागर करता है। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि वह संसद के चालू सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी। BJP का आरोप है कि ऐसे बयान देश की सेना का मनोबल गिराते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश देते हैं। कई BJP सांसदों ने मांग की है कि कांग्रेस पार्टी स्पष्ट करे कि क्या वह चव्हाण के बयान से सहमत है या नहीं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर सरकार विपक्ष को कठघरे में खड़ा करने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
कांग्रेस की मुश्किलें और आगे की राजनीति
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक तरफ पार्टी सरकार की नीतियों पर हमला बोलना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बयान उसे रक्षात्मक स्थिति में ला रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने निजी तौर पर माना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बेहद सावधानी से बोलने की जरूरत होती है। हालांकि, पृथ्वीराज चव्हाण अपने रुख पर अड़े हुए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में न तो बयान वापस लेंगे और न ही माफी मांगेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराएगा, खासकर तब जब संसद में इस पर सीधी बहस शुरू होगी। ऑपरेशन सिंदूर पर दिया गया यह बयान अब सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि कांग्रेस-BJP के बीच सियासी टकराव का बड़ा हथियार बन चुका है।
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