उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शनिवार को हरदोई में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उनसे समाजवादी पार्टी से जुड़े प्रतीक यादव के तलाक से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सवाल किया गया। इस पर अपर्णा यादव ने बेहद संक्षिप्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक पूरी तरह से व्यक्तिगत मामला है, इसलिए वह इस तरह के सवालों से बच रही हैं। जब पत्रकारों ने दोबारा सवाल किया कि सोशल मीडिया पर यह विषय चर्चा में है, फिर भी वह प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहीं, तो अपर्णा यादव ने कहा, “आपने खुद ही कहा है कि सवाल व्यक्तिगत है, इसलिए मैं इससे बच रही हूं।” उनके इस जवाब के बाद यह साफ हो गया कि वह निजी पारिवारिक मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करना सही नहीं मानतीं। उनके इस रुख को लेकर कई लोग इसे संयमित और जिम्मेदार बयान मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों से इस तरह के सवाल पूछे जाना आम बात है।
शंकराचार्य विवाद पर क्या बोलीं अपर्णा यादव
प्रतीक यादव के तलाक वाले सवाल के बाद मीडिया ने अपर्णा यादव से शंकराचार्य से जुड़े विवाद पर भी सवाल किए। इस दौरान उन्होंने धार्मिक और प्रशासनिक मामलों में जांच को ही सही रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में चार शंकराचार्यों की व्यवस्था आदि गुरु शंकराचार्य ने स्थापित की थी। ऐसे में यह एक तथ्यात्मक विषय है कि किसी व्यक्ति के पास शंकराचार्य की उपाधि है या नहीं। अपर्णा यादव ने साफ कहा कि फिलहाल उनके सामने इस संबंध में कोई ठोस तथ्य उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी आयोजन या मेले के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में कमी रही है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि कुंभ या अन्य बड़े सनातन मेलों में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और ऐसे में व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। अगर कहीं चूक हुई है, तो उस पर तथ्य के आधार पर बात होनी चाहिए, न कि आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी।
‘कोई भी संविधान से ऊपर नहीं’, कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश
अपर्णा यादव ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति संविधान और कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन की रिपोर्ट में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है, तो कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कोई भी हो। उन्होंने शंकराचार्य को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई। अपर्णा यादव ने कहा कि छींटाकशी करना या इस तरह की भाषा का प्रयोग करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं एक संत हैं और संतों को गुस्से या आवेश में इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि धार्मिक मामलों में संयम और मर्यादा बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके गुरुदेव और अन्य व्यवस्थित शंकराचार्यों की रथ यात्राएं हमेशा सम्मान और शांति के साथ संपन्न होती रही हैं और कभी इस तरह की अव्यवस्था सामने नहीं आई।
जांच की जरूरत, वैधता पर सवाल नहीं: अपर्णा यादव
जब मीडिया ने पूछा कि क्या वह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की वैधता पर सवाल उठा रही हैं और क्या यह आस्था से जुड़ा मामला नहीं है, तो अपर्णा यादव ने इस पर भी साफ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी की वैधता पर सवाल नहीं उठा रहीं। उनका कहना था कि सनातन धर्म में गुरु परंपरा और शंकराचार्य व्यवस्था की जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी को वैध या अवैध कहना नहीं है। अपर्णा यादव ने दोहराया कि अगर किसी आयोजन में अव्यवस्था हुई है, तो यह जांच का विषय है कि ऐसा कैसे और क्यों हुआ। इसमें प्रशासन की भूमिका, अधिकारियों की जिम्मेदारी और व्यवस्था में हुई चूक, सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सही तथ्यों के आधार पर जांच ही किसी भी विवाद का समाधान है। उनके इस बयान के बाद साफ हो गया कि अपर्णा यादव निजी मामलों में चुप्पी और सार्वजनिक व धार्मिक मामलों में कानून व मर्यादा के पक्ष में खड़ी नजर आती हैं।
