Amit Shah: संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान लोकसभा में उस समय राजनीतिक माहौल गर्म हो गया जब स्पीकर Om Birla को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammad Jawed ने सदन में रखा, जिस पर चर्चा के लिए करीब 10 घंटे का समय तय किया गया है। इस प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Tarun Gogoi की ओर से की गई थी। इसके बाद संसद में अलग-अलग दलों के नेता अपनी राय रख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद की कार्यवाही को काफी महत्वपूर्ण बना दिया है और देशभर की नजरें इस बहस पर टिकी हुई हैं।
Amit Shah ने स्पीकर के अधिकारों पर रखी स्पष्ट बात
इस बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी अपनी बात रखते हुए स्पीकर के अधिकारों का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा के स्पीकर पूरे सदन के होते हैं और उनका काम सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना होता है। अमित शाह ने कहा कि अगर कोई सदस्य नियमों का उल्लंघन करता है या सदन की मर्यादा का पालन नहीं करता, तो स्पीकर के पास उसे रोकने, टोकने और आवश्यकता पड़ने पर सदन से बाहर करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये अधिकार किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाए, बल्कि संसद के नियमों के तहत तय किए गए हैं। अमित शाह ने कहा कि लोकतंत्र में नियमों और परंपराओं का सम्मान करना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाने को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
अमित शाह (Amit Shah) ने अपने भाषण में यह भी कहा कि स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना संसदीय परंपराओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ओम बिरला को स्पीकर चुना गया था, तब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने मिलकर उन्हें कुर्सी तक पहुंचाया था। उनका कहना था कि स्पीकर सदन के संरक्षक होते हैं और उन्हें निष्पक्ष तरीके से सदन की कार्यवाही चलाने की जिम्मेदारी दी जाती है। अमित शाह ने यह भी कहा कि भारतीय लोकतंत्र में कई राजनीतिक बदलाव आए हैं और उनकी पार्टी भी लंबे समय तक विपक्ष में रही है, लेकिन उन्होंने कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की परंपरा नहीं अपनाई। उनके मुताबिक, सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास और सम्मान के आधार पर चलती है।
संसदीय इतिहास में कम ही आए ऐसे प्रस्ताव
गृह मंत्री Amit Shah ने अपने भाषण में यह भी बताया कि भारतीय संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बहुत कम बार लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले 1954 में सोशलिस्ट पार्टी की ओर से एक प्रस्ताव लाया गया था। इसके बाद भी कुछ मौकों पर ऐसे प्रस्ताव सामने आए, लेकिन यह बहुत दुर्लभ स्थिति होती है। अमित शाह ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नियमों और संस्थाओं का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा जारी है और आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि इस पर सदन का अंतिम फैसला क्या होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस सिर्फ एक प्रस्ताव तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संसद की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक परंपराओं पर भी व्यापक चर्चा हो रही है।
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