Sunday, February 1, 2026
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30% सस्ता किराया और जीरो कमीशन! भारत टैक्सी एप के सस्ते किराए ने मचा दी हलचल,ओला-उबर पर बढ़ा दबाव

भारत टैक्सी एप में 30% तक सस्ता किराया, बिना सर्ज प्राइसिंग और ड्राइवर्स को ज्यादा कमाई। जानिए कैसे यह नया सहकारी मॉडल ओला-उबर जैसी कंपनियों पर असर डाल रहा है।

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देश के कैब एग्रीगेटर बाजार में इस महीने एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। केंद्र से जुड़ी सहकारी पहल के तहत शुरू की गई ‘भारत टैक्सी एप सेवा’ ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों को सीधी चुनौती दे दी है। यह एप न सिर्फ कम किराए का दावा कर रहा है, बल्कि ड्राइवर्स को सशक्त बनाने के उद्देश्य से भी लॉन्च किया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक भारत टैक्सी एप के जरिए यात्रियों को 20 से 30 प्रतिशत तक सस्ता किराया मिल रहा है। यही वजह है कि लॉन्च के कुछ ही दिनों में यह एप चर्चा का विषय बन गया है। दिल्ली से इसकी शुरुआत हो चुकी है और आने वाले समय में इसे देश के अन्य शहरों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। कैब सेवा से जुड़े ड्राइवर और यात्री दोनों ही इस नए प्लेटफॉर्म को लेकर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

जीरो या कम कमीशन मॉडल, ड्राइवर्स की कमाई में बड़ा फर्क

अब तक ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म ड्राइवरों की कमाई से 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन काटते रहे हैं। इससे ड्राइवर्स की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है और उन्हें ज्यादा घंटे काम करने के बावजूद सीमित कमाई होती है। भारत टैक्सी एप ने इसी मॉडल को चुनौती दी है। यह प्लेटफॉर्म या तो जीरो कमीशन पर काम कर रहा है या फिर बेहद मामूली फीस ले रहा है। इसका नतीजा यह है कि ड्राइवर्स को अपने किराए का 80 से 100 प्रतिशत तक हिस्सा मिलने की बात कही जा रही है। ड्राइवरों का कहना है कि इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि वे निजी कंपनियों की शर्तों और दबाव से भी मुक्त महसूस करेंगे। सहकारी मॉडल पर आधारित होने के कारण ड्राइवरों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि भागीदार की तरह देखा जा रहा है, जो इस एप की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।

बिना सर्ज प्राइसिंग, यात्रियों को भी बड़ी राहत

भारत टैक्सी एप का असर सिर्फ ड्राइवर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों के लिए भी यह एक बड़ी राहत बनकर उभरा है। ओला-उबर जैसे प्लेटफॉर्म पर डायनामिक या सर्ज प्राइसिंग के कारण पीक टाइम में किराया अचानक दोगुना या तिगुना हो जाता है। इससे यात्रियों को मजबूरी में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। भारत टैक्सी एप इस व्यवस्था से अलग है। यहां किराया स्थिर और पारदर्शी रखा गया है, जिससे यात्रियों को पहले से पता रहता है कि उन्हें कितनी रकम चुकानी होगी। 30 प्रतिशत तक कम किराया और बिना सर्ज प्राइसिंग का मॉडल मध्यम वर्ग और रोजाना कैब इस्तेमाल करने वालों के लिए खासा आकर्षक साबित हो रहा है। इससे यात्रियों और ड्राइवरों के बीच भरोसे का रिश्ता भी मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

ओला-उबर पर असर और आगे की तस्वीर

भारत टैक्सी एप के आने से कैब एग्रीगेटर बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज होना तय माना जा रहा है। जहां निजी कंपनियां अब तक अपने बड़े नेटवर्क और ब्रांड के भरोसे आगे थीं, वहीं अब उन्हें किराए और कमीशन को लेकर नई रणनीति बनानी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत टैक्सी एप अपने वादों पर खरा उतरता है और देशभर में सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो ओला-उबर को भी अपने कमीशन मॉडल और सर्ज प्राइसिंग पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। साथ ही, ड्राइवर्स के लिए कंपनी में हिस्सेदारी और ज्यादा कमाई का विचार आने वाले समय में पूरे ट्रांसपोर्ट सेक्टर को नया दिशा दे सकता है। फिलहाल, भारत टैक्सी एप को ड्राइवर-फ्रेंडली और पैसेंजर-फ्रेंडली विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने कैब सेवा की मौजूदा व्यवस्था को चुनौती देकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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