मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में शामिल जबलपुर में रविवार की दोपहर ऐसा खौफनाक सड़क हादसा हुआ, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। शहर के बरेली थाना क्षेत्र अंतर्गत सिग्मा कॉलोनी के सामने सड़क निर्माण का काम चल रहा था। इसी दौरान मजदूर रोड डिवाइडर की रेलिंग लगाने का काम पूरा कर थोड़ी देर के लिए खाना खा रहे थे। अचानक तेज रफ्तार से आई एक कार ने नियंत्रण खो दिया और सीधे मजदूरों के समूह में घुस गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मौके पर चीख-पुकार मच गई और सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दर्दनाक हादसे में मौके पर ही दो महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और पुलिस को सूचना दी गई।
मृतक और घायलों की पहचान, मंडला से आए थे मजदूर
इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाली मजदूर महिलाओं की पहचान चैनवती (35) और लच्छो बाई (38) के रूप में हुई है। दोनों ही मंडला जिले की रहने वाली थीं और रोजी-रोटी के लिए जबलपुर में सड़क निर्माण कार्य में लगी हुई थीं। वहीं घायलों में गोमती बाई (40), राजकुमारी (37), वर्षा बाई (39), कृष्णा बाई (41), अकलवती (36), प्रभावती (40), मीरा बाई (38), जमना बाई (35), ज्ञानवती (41), भगवती (37), लक्ष्मी बाई (39) और छोटीबाई (36) शामिल हैं। सभी घायलों को तुरंत एंबुलेंस की मदद से जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों और घायलों के परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल में भावुक दृश्य देखने को मिले।
फरार ड्राइवर की तलाश तेज
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पल्लवी शुक्ला ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसा दोपहर करीब 2 बजे एकता चौक के पास हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कार तेज रफ्तार में थी और उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट भी नहीं लगी हुई थी। हादसे के तुरंत बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है और अलग-अलग टीमों को ड्राइवर की तलाश में लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस घटना के बाद शहर में सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निर्माण स्थल पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत होते, तो शायद इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी।
प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर और एसपी पहुंचे अस्पताल
हादसे की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के लिए आवश्यक निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से घायलों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही मृतकों के परिजनों को भी सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस घटना के बाद प्रशासन ने शहर में चल रहे सभी सड़क निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके। जबलपुर की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को उजागर करती है, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान मेहनत-मजदूरी करने वाले निर्दोष लोगों को उठाना पड़ता है।
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