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कान्हा की नगरी में ‘राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू’ की विशेष हाजिरी: प्रेमानंद महाराज की कुटिया में क्या होगी गुप्त चर्चा और क्यों खास है यह गिरिराज परिक्रमा?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मथुरा-वृंदावन दौरा: प्रेमानंद महाराज से आध्यात्मिक चर्चा और गोवर्धन परिक्रमा की पूरी जानकारी। जानें सुरक्षा के कड़े इंतजाम और राष्ट्रपति का पूरा शेड्यूल।

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ब्रज की पावन भूमि एक बार फिर ऐतिहासिक पलों की गवाह बनने जा रही है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने तीन दिवसीय दौरे पर कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन पहुँच रही हैं। यह दौरा केवल एक आधिकारिक यात्रा नहीं, बल्कि पूरी तरह से भक्ति और आध्यात्मिकता के रंग में डूबा हुआ नजर आ रहा है। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे मथुरा जनपद को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन से लेकर सुरक्षा एजेंसियां तक हाई अलर्ट पर हैं। इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रपति का वह समय है, जो वह प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के सानिध्य में बिताएंगी। ब्रजवासियों में इस बात को लेकर भारी उत्साह है कि देश की सर्वोच्च पद पर आसीन महिला एक साधारण भक्त की तरह गिरिराज जी की शरण में आ रही हैं।

प्रेमानंद महाराज से आध्यात्मिक संवाद

राष्ट्रपति के इस दौरे का केंद्र बिंदु वृंदावन वाले संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ होने वाला सत्संग है। हाल के वर्षों में प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए देश-विदेश से दिग्गजों का तांता लगा रहता है, लेकिन राष्ट्रपति का उनसे मिलना एक विशेष संदेश देता है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति महाराज जी की कुटिया में कुछ समय एकांत में बिताएंगी, जहाँ जीवन के दर्शन और आध्यात्मिक शांति पर चर्चा होने की संभावना है। प्रेमानंद महाराज, जो अपने बेबाक और ज्ञानवर्धक सत्संग के लिए जाने जाते हैं, उनके साथ राष्ट्रपति की यह मुलाकात सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासन ने इस मुलाकात के दौरान सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए हैं कि परिंदा भी पर न मार सके, वहीं भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

गिरिराज जी की परिक्रमा: सादगी की मिसाल पेश करेंगी राष्ट्रपति

अपने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गोवर्धन पर्वत यानी गिरिराज जी की परिक्रमा भी करेंगी। मान्यता है कि ब्रज की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक गिरिराज जी के चरणों में माथा न टेका जाए। राष्ट्रपति के लिए विशेष ई-रिक्शा और सुरक्षा काफिले का इंतजाम किया गया है, लेकिन चर्चा है कि वह परिक्रमा के कुछ हिस्से को पैदल तय कर अपनी श्रद्धा प्रकट कर सकती हैं। दानघाटी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद वह सप्तकोसीय परिक्रमा के मुख्य स्थलों का अवलोकन करेंगी। मुकुंदरा और अन्य कुंडों की महत्ता को समझने के साथ-साथ वह ब्रज की पौराणिक विरासत को भी करीब से देखेंगी। राष्ट्रपति के इस कदम को भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं के प्रति उनके अटूट विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।

सुरक्षा का घेरा और बदल गया ब्रज का नजारा

राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन के ट्रैफिक प्लान में भारी बदलाव किए गए हैं। तीन दिनों तक बाहरी वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। एनएसजी (NSG) कमांडो और स्थानीय पुलिस बल ने पूरे इलाके को अपनी निगरानी में ले लिया है। बांके बिहारी मंदिर और सप्तदेवालयों की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। हालांकि, प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि आम श्रद्धालुओं को कम से कम असुविधा हो, लेकिन सुरक्षा कारणों से कई स्थानों पर आवाजाही सीमित रहेगी। राष्ट्रपति के इस दौरे ने न केवल ब्रज की धार्मिक महत्ता को वैश्विक पटल पर और मजबूत किया है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और विकास की संभावनाओं को भी नई ऊर्जा दी है।

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