नई दिल्ली में आयोजित Sanatan Sant Sammelan 2025 इस बार सिर्फ एक आध्यात्मिक मंच नहीं रहा, बल्कि ऐसी चेतावनियों का केंद्र बन गया, जिसने सभागार में मौजूद हर व्यक्ति को कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध कर दिया। जब स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज मंच पर आए, तो माहौल में अचानक गंभीरता तैर गई। उन्होंने कहा कि “अगर हम सोते रहे तो स्थिति बांग्लादेश जैसी हो जाएगी… और तब संभलने का समय भी नहीं बचेगा।” उनके इस वक्तव्य ने सभा में बैठे सैकड़ों साधु-संतों, विद्वानों और उपस्थित नागरिकों के मन में एक बड़ा प्रश्न छोड़ दिया—क्या हम किसी ऐसे खतरे की ओर बढ़ रहे हैं जिसे पहचानने में हम देर कर रहे हैं?
स्वामी गिरी ने बताया कि देश पर एक साथ बाहरी और अंदरूनी दोनों तरह के खतरे मंडरा रहे हैं। लाल किले से लेकर पहलगाम की वादियों तक, सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं। “दीमक की तरह भीतर से खोखला करती ताकतों” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक या धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर संकट है। यह आरंभ उस कहानी का है जिसकी दिशा आने वाले वर्षों में देश की सुरक्षा नीति को बदल सकती है।
भीतर की दीमक या बाहर का साया — असली दुश्मन कौन?
सम्मेलन में कई संतों ने इस बात पर जोर दिया कि आज देश एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ खतरे दिखाई भी दे रहे हैं और अदृश्य भी। स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि बाहरी आतंकी गतिविधियों का खतरा तो सामने है, लेकिन असली चुनौती उन शक्तियों से है जो देश की सामाजिक संरचना को धीरे-धीरे कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि “माताएं-बहनें सुरक्षित नहीं, समाज में अविश्वास बढ़ रहा, और राष्ट्र की मूल संस्कृति पर चोटें लगातार हो रही हैं।”
सभा में बैठे साधुओं ने कहा कि अगर देश समय रहते इन संकेतों को नहीं पहचानेगा, तो भविष्य का परिदृश्य डरावना हो सकता है। कई संतों ने सवाल उठाया कि क्यों लोगों को अब भी यह समझ नहीं आ रहा कि देश एक ऐसे चौराहे पर है जहाँ से गलत दिशा में मुड़ना भारी कीमत मांग सकता है। इस पूरे वक्तव्य ने सम्मेलन को अचानक एक आध्यात्मिक सभा से राष्ट्रीय सुरक्षा के मंच का रूप दे दिया।
इजरायल मॉडल: क्या भारत भी अपनाएगा कड़ी सजगता?”
सम्मेलन का सबसे अहम और चर्चा में आने वाला हिस्सा वह था जहाँ स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने इजरायल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल चारों तरफ दुश्मनों से घिरा होने के बावजूद आज संसार के सबसे सुरक्षित देशों में गिना जाता है। कारण सिर्फ एक—“उनका सुरक्षा घेरा कभी ढीला नहीं पड़ता।”
स्वामी गिरी ने कहा कि भारत को भी यही रास्ता चुनना होगा। मजबूत सीमाएं, सजग नागरिक, और परंपरा की रक्षा—यह तीन स्तंभ अगर एक साथ खड़े हों तो कोई भी शक्ति देश को हिला नहीं सकती। सभा में मौजूद संतों ने सामूहिक रूप से धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में समाज को एकजुट करने, युवा पीढ़ी को जागरूक बनाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति चेतना फैलाने के बड़े अभियानों की शुरुआत की जाएगी।
सम्मेलन ने एक ऐसे संदेश के साथ समापन किया जिसने लोगों के मन में एक गहरी सोच छोड़ दी—क्या हम सच में सुरक्षित हैं, या सिर्फ सुरक्षित होने का भ्रम पाल बैठे हैं?
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