श्री कृष्ण जन्मभूमि केस के मुख्य वादी और मथुरा के प्रमुख संत आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के एक कदम ने इस समय पूरे देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। हाल ही में शंकराचार्य पर संगीन आरोप लगाकर चर्चा में आए आशुतोष ब्रह्मचारी ने अब अपने ही पूज्य गुरुदेव जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज को एक बेहद भावुक और चौंकाने वाली चिट्ठी लिखी है। इस पत्र के सामने आते ही संत समाज में भारी हलचल पैदा हो गई है। पत्र में जहां एक तरफ गुरु-शिष्य की मर्यादा को लेकर गहरा दर्द छिपा है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा खौफनाक दावा किया गया है जिसने उत्तर प्रदेश से लेकर केंद्र सरकार तक के कान खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक ऐसा सस्पेंस पैदा कर दिया है कि हर कोई अब इसकी तह तक जाना चाहता है।
मजबूरी में उठानी पड़ी मर्यादा की दीवार, भारी मन से मांगी गुरु से क्षमा
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने पत्र की शुरुआत अत्यंत पीड़ा और भारी मन से की है। उन्होंने अपने गुरुदेव से विनम्र क्षमा याचना करते हुए लिखा कि उन्होंने जीवन में कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन्हें ऐसा कठोर कदम उठाना पड़ेगा। सनातन संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा को सर्वोच्च माना गया है, और आशुतोष जी ने स्वीकार किया कि गुरु के साथ हुई निजी और गोपनीय वार्ताओं को सार्वजनिक करना उनके संस्कारों, संस्कृति और अटूट श्रद्धा के सर्वथा खिलाफ है। लेकिन उन्होंने साफ किया कि उनके सामने परिस्थितियां ही कुछ ऐसी खड़ी कर दी गई थीं, जहां उनके पास अपनी बात साबित करने का कोई दूसरा रास्ता ही शेष नहीं बचा था।
चरित्र पर उठे सवाल, तो सच सामने लाने के लिए उठाया यह कठिन कदम
चिट्ठी में आशुतोष महाराज ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि पिछले कुछ समय से उनकी निष्ठा, उनके सत्य और उनके पावन चरित्र पर लगातार तीखे प्रश्नचिह्न खड़े किए जा रहे थे। उन्हें समाज में बदनाम करने, उनके बयानों को झूठा साबित करने और आम जनता के बीच भारी भ्रम फैलाने की सोची-समझी साजिश रची जा रही थी। आशुतोष ब्रह्मचारी के अनुसार, ऐसी विपरीत स्थिति में खुद पर लगे आरोपों का करारा जवाब देने और समाज के सामने वास्तविक सत्य को उजागर करने के लिए ही उन्हें अपने और गुरुदेव के बीच हुई बेहद निजी बातचीत के कुछ अंश सार्वजनिक करने का यह बेहद कठिन और आत्मघाती निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी का अनादर करना कतई नहीं था।
गुरु के प्रति अटूट समर्पण, लेकिन रामचंद्र दास पर लगाए बेहद गंभीर आरोप
अपने पत्र में आशुतोष ब्रह्मचारी ने साफ किया कि उनके दिल में अपने पूज्य गुरुदेव के प्रति वही पुरानी श्रद्धा, आदर और समर्पण का भाव आज भी जीवित है, जो हमेशा से था। वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति मिले। हालांकि, इस पत्र का सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आता है जब आशुतोष महाराज सीधे तौर पर अपने गुरुदेव की सुरक्षा को लेकर देश के शीर्ष नेतृत्व से गुहार लगाते हैं। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष आग्रह किया है कि उनके गुरुदेव को रामचंद्र दास नामक व्यक्ति से तुरंत दूर किया जाए और बेहद गोपनीय तरीके से गुरुजी के बयान दर्ज कराए जाएं।
पीएम मोदी और सीएम योगी से गुहार: ‘हत्या हुई तो ये दो भाई होंगे जिम्मेदार’
पत्र के अंत में आशुतोष ब्रह्मचारी ने जो दावा किया है, उसने इस पूरे मामले को एक गंभीर आपराधिक और संदेहास्पद मोड़ दे दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके पूज्य गुरु जी की व्यक्तिगत सुरक्षा की तत्काल चिंता की जाए। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में लिखा, “यदि मेरे पूज्य गुरु जी की हत्या हुई, तो इसके लिए सीधे तौर पर रामचंद्र दास उर्फ जय मिश्रा और उसका भाई ही पूरी तरह दोषी होंगे।” इस सनसनीखेज दावे के बाद अब यह मामला सिर्फ संतों का आपसी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ी सुरक्षा चिंता का विषय बन चुका है, जिस पर सरकार की पैनी नजर है।
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