बस्ती जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रियल स्टेट और मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी बाग के पास आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान ‘टाइम सिटी मल्टी स्टेट क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड’ के निवेशकों और पूर्व पदाधिकारियों ने कंपनी के प्रबंधन और कप्तानगंज के पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला पर धोखाधड़ी का बड़ा आरोप लगाया है। मऊ और गोरखपुर से आए निवेशकों (आलोक श्रीवास्तव और राजेंद्र यादव) का कहना है कि वर्ष 2010 में स्थापित इस कंपनी में लोगों ने राजनेता के रसूख और भरोसे पर अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश किया था, लेकिन वादों के विपरीत न तो उन्हें जमीन मिली और न ही उनका पैसा वापस किया गया।
कूटरचित दस्तावेजों का खेल और धमकियां देने के आरोप
प्रेसवार्ता में निवेशकों ने खुलकर आरोप लगाया कि कंपनी के नाम पर जो जमीनें खरीदी गई थीं, उन्हें बाद में फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे अन्य लोगों को चुपचाप बेच दिया गया। जब निवेशकों ने अपनी डूबी हुई रकम और भूखंडों के लिए कंपनी के प्रमुखों से संपर्क साधा, तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा। आरोप यह भी है कि जब इस पूरे फर्जीवाड़े को लेकर पूर्व विधायक से सीधी बात करने की कोशिश की गई, तो उन्हें कथित तौर पर गालियां दी गईं और डराया-धमकाया गया। निवेशकों का दावा है कि कंपनी का बोर्ड तक अवैध तरीके से बदलकर जमीनों का सुनियोजित ढंग से सौदा किया गया, जिससे सैकड़ों परिवारों की पूंजी अधर में लटक गई है।
राजनीतिक रसूख के साये में डूबी निवेशकों की गाढ़ी कमाई
वर्ष 2017 में जब कंपनी के सीएमडी और एमडी चंद्र प्रकाश शुक्ला बस्ती की कप्तानगंज विधानसभा सीट से विधायक चुने गए, तो उनका राजनीतिक प्रभाव निवेशकों के लिए एक बड़ा भरोसा बन गया था। निवेशकों का तर्क है कि इसी रसूख के बल पर कंपनी ने बड़े पैमाने पर जनता से फंड जुटाया और बाद में निवेशकों को उनकी ही रकम के लिए दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया गया। हालांकि, इन गंभीर और सनसनीखेज आरोपों के बीच पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला ने अपनी सफाई में खुद को बेकसूर बताया है। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि उन्होंने वर्ष 2017 में ही इस कंपनी से अपना इस्तीफा दे दिया था और वर्तमान में उनका इस संस्थान से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और शासन-प्रशासन से गुहार
एक तरफ जहां पीड़ित निवेशक इसे सुनियोजित ठगी बताते हुए शासन और प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व विधायक ने इसे अपनी राजनीतिक छवि को धूमिल करने के लिए रचा गया एक शातिर षड्यंत्र करार दिया है। उनका कहना है कि विरोधियों द्वारा उनके खिलाफ यह बेबुनियाद प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है और वह इस मामले में मानहानि व कानूनी कार्रवाई का रास्ता अख्तियार करेंगे। बहरहाल, करोड़ों रुपयों के इस कथित फर्जीवाड़े ने बस्ती के राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में भूचाल ला दिया है, और अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर कब तक पीड़ितों को इंसाफ दिला पाता है।
