दिल्ली के दिल — लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम अचानक हुई जोरदार धमाके ने पूरे शहर को हिला दिया। एक सफेद हुंडई i20 कार में हुए इस विस्फोट में 9 लोगों की मौत हो गई और करीब 20 घायल बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि यह विस्फोट एक बड़ी साजिश का हिस्सा था, जिसमें करीब 3000 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही थी। मगर संदिग्ध आरोपी डॉ. उमर मोहम्मद कथित रूप से घबरा गया और पैनिक में उसने बम को समय से पहले ही सक्रिय कर दिया, जिससे ब्लास्ट सीमित क्षेत्र तक सिमट गया।
विस्फोट का सच, जांच में नया मोड़
जांच एजेंसियों के अनुसार, कार विस्फोटक से भरी जरूर थी, लेकिन वह पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई। यही वजह रही कि धमाके से जमीन में गड्ढा नहीं बना और न ही आसपास भारी नुकसान हुआ। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में दिल्ली-एनसीआर और पुलवामा में कई छापेमारियां की थीं, जिनमें बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। इसी दबाव में संदिग्ध ने जल्दबाजी में कार्रवाई की, जिससे उसकी पूरी साजिश फेल हो गई। जांच में यह भी सामने आया है कि कार को किसी लक्ष्य से टकराने की कोशिश नहीं की गई, जो यह साबित करता है कि यह आत्मघाती हमला नहीं था, बल्कि एक अधूरी आतंकी साजिश का हिस्सा था।
गिरफ्तारी, बरामदगी और सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एनआईए ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से तीन अन्य डॉक्टरों को हिरासत में लिया है, जिनके बारे में शक है कि वे उमर मोहम्मद के मॉड्यूल से जुड़े हुए थे। जांच में पता चला है कि ये सभी मिलकर देशभर में एक बड़े नेटवर्क के लिए विस्फोटक तैयार कर रहे थे। जांच टीम को अब तक करीब 2,900 किलो विस्फोटक और इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगरिंग डिवाइस मिले हैं। अधिकारियों ने इसे देश के लिए “एक बड़ा खतरा टल गया” बताया है और कहा है कि सतर्क एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई ने भारी तबाही से दिल्ली को बचा लिया।
READ MORE-धर्मेंद्र की सांसद पेंशन को लेकर बड़ा खुलासा! जानिए कौन उठा रहा है अब तक फायदा
