तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों एक ऐसा बड़ा फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसकी गूंज पूरे देश के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में सुनाई दे रही है। अभिनेता से राजनेता बने और हाल ही में सत्ता की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री थलपति विजय ने पूर्ववर्ती एमके स्टालिन की डीएमके (DMK) सरकार के एक बहुत बड़े फैसले को पूरी तरह पलट दिया है। सीएम विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मंदिरों के फंड से बनने वाले ₹245.85 करोड़ की लागत के कुल 46 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की प्रशासनिक मंजूरी को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। सरकार के इस औचक फैसले ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, जिससे विपक्ष से लेकर आम जनता तक हर कोई हैरान है।
आखिर क्यों रोके गए करोड़ों के प्रोजेक्ट्स?
हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, जिन 46 प्रोजेक्ट्स को रद्द किया गया है, उनमें ₹115.77 करोड़ की लागत से बनने वाले 29 मैरिज हॉल और ₹130.08 करोड़ के 17 कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल थे। टीवीके सरकार ने इस फैसले पर सफाई देते हुए साफ किया कि इन सभी प्रोजेक्ट्स पर अभी जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ था। सरकार का मानना है कि मंदिरों के रेवेन्यू को इस तरह के गैर-धार्मिक व्यावसायिक कामों में लगाने से मंदिरों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। मंदिरों को संभावित वित्तीय संकट और दिवालिया होने की स्थिति से बचाने के लिए इन पर तुरंत रोक लगाना बेहद जरूरी था।
सालों पुरानी मांग पर लगी मुहर, हिंदू संगठनों में खुशी
तमिलनाडु में लंबे समय से विभिन्न हिंदू संगठन और दक्षिणपंथी कार्यकर्ता इस बात का कड़ा विरोध कर रहे थे कि मंदिरों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स या मैरिज हॉल जैसे कमर्शियल कामों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनकी मांग थी कि आस्था के केंद्रों का पैसा सिर्फ और सिर्फ सनातन और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर ही खर्च हो। यहाँ तक कि मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी पहले इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था। अब सीएम विजय ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को रद्द कर सीधे तौर पर श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों की बरसों पुरानी मांग को पूरा कर दिया है, जिसे एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।
अब कहाँ इस्तेमाल होगा मंदिरों का पैसा?
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद नई सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं पूरी तरह साफ कर दी हैं। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी दो दिन पहले विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान HR&CE विभाग में बड़े सुधारों का संकेत दिया था। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यह पूरा ₹246 करोड़ रुपये का फंड राज्य भर के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार, उनकी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने और दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने जैसे पवित्र और धार्मिक कार्यों में ही लगाया जाएगा। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री थलपति विजय की जमकर तारीफ हो रही है और लोग इसे मंदिर प्रशासन को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं।
