Sunday, February 1, 2026
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तिरंगे में लिपटा बेटा… रो पड़ी वर्दी में खड़ी पत्नी; तेजस पायलट नमांश की विदाई ने पूरे हिमाचल को रुला दिया

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दुबई एयरशो में भारतीय तेजस फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर जैसे ही आई, देशभर में चिंता की लहर दौड़ गई। लेकिन जब रविवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में तिरंगे में लिपटा विंग कमांडर नमांश स्याल अपने गांव लौटे, तो यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं रही, यह एक परिवार, एक गांव और पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षण बन गया। विशेष विमान से पार्थिव शरीर जैसे ही गग्गल एयरपोर्ट लाया गया, वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव की गलियों में एक ऐसी खामोशी थी, जिसमें सिर्फ माता-पिता के आंसुओं की आवाज सुनाई दे रही थी।

पटियालकर गांव में उनके घर के बाहर हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी थी, लेकिन उस भीड़ में भी एक चुभती हुई चुप्पी थी। नमांश की मां को जब अंतिम बार अपने बेटे को छूने का मौका मिला, तो उनका शरीर कांप उठा। वहीं पिता गगन कुमार, जो खुद एक शिक्षक रहे हैं, बार-बार यही कहते दिखे,“बेटा तो मेरा था, पर गर्व पूरे देश का था।” इस वाक्य में उनके टूटे हुए दिल और उभरे हुए जज़्बे दोनों की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

वर्दी में खड़ी पत्नी अफशां का मजबूत चेहरा भी नम हो गया…

विंग कमांडर नमांश की पत्नी अफशां भी भारतीय वायुसेना में अफसर हैं। नौकरी की वर्दी ने उन्हें हमेशा दृढ़ बनाया, लेकिन आज वही वर्दी उनके कंधों पर भारी पड़ गई। जब पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी दी गई, अफशां ने अपने पति को वर्दी में खड़े होकर सैल्यूट किया। उस पल को देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। जिस महिला ने जीवनभर अनुशासन सीखा, उसने उसी अनुशासन के साथ अपने पति को विदाई दी, लेकिन आंखों से निकलते आंसू बता रहे थे कि यह दर्द किसी भी सैन्य प्रशिक्षण से बड़ा है।

उनकी 7 साल की बेटी बार-बार पूछती रही कि “पापा कब उठेंगे?” इस एक सवाल ने वहां मौजूद हर दिल को चीर दिया। बच्ची को अभी यह समझ भी नहीं कि वह जिस ताबूत को छू रही है, उसके अंदर उसका ‘हीरो पापा’ सो नहीं रहे… बल्कि हमेशा के लिए विदा हो चुके हैं। गांव की महिलाएं उसे देखकर रोने लगतीं और फिर अपने चेहरे ढक लेतीं। वायुसेना के अधिकारी भी भावुक हुए बिना नहीं रह पाए, क्योंकि नमांश सिर्फ एक पायलट नहीं, बल्कि युवा अफसरों के लिए प्रेरणा थे।

गांव की मिट्टी ने अपने लाल का स्वागत भी गर्व से किया

गग्गल एयरपोर्ट से गांव तक लगभग हर मोड़ पर लोग फूल लेकर खड़े थे। कोई हाथ जोड़ रहा था, कोई आंसू पोंछ रहा था और कोई तिरंगे को छूकर नमांश को अंतिम प्रणाम कर रहा था। गांव में जब उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो ढोल-नगाड़े के बजाय सिर्फ शोक की धीमी आवाजें सुनाई दे रही थीं। बच्चों ने स्कूल से छुट्टी ले ली, बुजुर्गों ने अपनी लाठी छोड़ दी और महिलाएं अपने आंगन में दीया जलाकर खड़ी हो गईं—“आज हमारा बेटा घर आया है” कहते हुए।

अंतिम संस्कार के समय उनके चाचा के बेटे निशांत ने मुखाग्नि दी। हवा में उठती चिता और आसपास खड़े लोगों का मौन, दोनों मिलकर एक ही संदेश दे रहे थे कि नमांश ने सिर्फ परिवार ही नहीं, पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि नमांश उन चुनिंदा एयरोबेटिक पायलटों में से थे, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय शो में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। उनके जाने से न सिर्फ परिवार टूटा है, बल्कि वायुसेना ने भी एक बेहद प्रतिभाशाली योद्धा खो दिया है।

गांव के लोग बताते हैं कि नमांश हमेशा मुस्कुराते हुए मिलते थे, छुट्टियों में गांव के बच्चों को विमान और उड़ान के बारे में किस्से सुनाते थे, और अपने पिता के साथ खेत में कुछ देर बैठना कभी नहीं भूलते थे। आज जब वही नमांश तिरंगे में लिपटकर जा रहे थे, तो पूरी कांगड़ा घाटी उनकी बहादुरी और सरलता को सलाम करते दिखी।

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