बागपत जिले के मलकपुर क्षेत्र में चीनी मिल के गंदे नाले से फैल रहे प्रदूषण और बीमारियों को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। दो दिन से एशिया चैंपियन सुभाष पहलवान सोशल मीडिया पर मिल के नाले से हो रही परेशानियों पर चर्चा कर रहे हैं। मंगलवार शाम उन्होंने फेसबुक लाइव के दौरान चौंकाने वाली घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि अगर नाले की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह मिल के इसी नाले में जल समाधि लेकर अपना जीवन त्याग देंगे। पहलवान ने साफ कहा कि उनकी यह लड़ाई किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि गांव और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए है।
नाले की गंदगी से बढ़ती बीमारियां और पर्यावरण संकट
स्थानीय ग्रामीणों और सुभाष पहलवान का दावा है कि मलकपुर चीनी मिल का यह नाला गांवों में प्रदूषण और बीमारी का मुख्य कारण बन चुका है। नाले की जहरीली बदबू से लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। पानी और मिट्टी दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे बढ़ते जा रहे हैं। पहलवान ने कहा कि यह गंदगी आने वाली युवा पीढ़ियों के लिए मौत का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि कई पशु और लोग इस नाले की वजह से घायल या बीमार हुए हैं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जनप्रतिनिधियों और सरकार पर दबाव बनाने की अपील
फेसबुक लाइव के दौरान सुभाष पहलवान ने क्षेत्रीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और मिल प्रबंधन को कठोर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और मिल प्रबंधन को नाले की व्यवस्था सुधारने के लिए मजबूर करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक जनता एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएगी, तब तक कोई समाधान नहीं निकलेगा। पहलवान ने लॉयन और मलकपुर के ग्रामीणों से भी अपील की कि इस लड़ाई में एक साथ खड़े हों, क्योंकि यह सिर्फ किसी एक गांव की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की समस्या है।
घोषणा के बाद क्षेत्र में मचा हड़कंप
सुभाष पहलवान के जल समाधि लेने के ऐलान के बाद न सिर्फ मलकपुर और लॉयन गांवों में, बल्कि पूरे बागपत जिले में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों में चिंता और गुस्सा दोनों महसूस किया जा रहा है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन और सरकार जल्द से जल्द इस मुद्दे पर कदम उठाएगी। गांव के युवाओं और समाजसेवियों ने भी पहलवान के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है। सभी की मांग है कि प्रदूषण फैलाने वाले नाले को या तो बंद किया जाए या उसकी आधुनिक व्यवस्था की जाए, ताकि गांव प्रदूषण और बीमारी के संकट से मुक्त हो सके।
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