राजा रघुवंशी मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को आखिरकार शर्तों के साथ जमानत मिल गई है, लेकिन इस फैसले के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि सोनम को फिलहाल मेघालय में ही रहना होगा और नियमित रूप से स्थानीय थाने में हाजिरी देनी होगी। इसके अलावा उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके के साथ दो जमानतदार भी पेश करने होंगे। अदालत ने यह भी कहा है कि वह बिना अनुमति क्षेत्र नहीं छोड़ सकतीं और हर सुनवाई में कोर्ट में मौजूद रहना अनिवार्य होगा। इस फैसले ने जहां एक ओर कानूनी बहस को जन्म दिया है, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक रिश्तों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
भाई का सख्त रुख, रिश्ता तोड़ा
जमानत मिलने के बाद सबसे चौंकाने वाला बयान सोनम के भाई गोविंद का सामने आया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि परिवार का सोनम से अब कोई लेना-देना नहीं है और वे उसे कभी अपने घर इंदौर नहीं लाएंगे। गोविंद ने यह भी बताया कि परिवार इस केस को नहीं लड़ रहा है और सोनम को सरकारी वकील ही दिया गया है। उनका यह बयान दर्शाता है कि इस मामले ने सिर्फ कानूनी ही नहीं, बल्कि पारिवारिक स्तर पर भी गहरी दरार डाल दी है। आमतौर पर ऐसे मामलों में परिवार आरोपी के साथ खड़ा नजर आता है, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल उलट है।
गिरफ्तारी प्रक्रिया पर कोर्ट के सवाल
अदालत ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के समय सोनम को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि उन्हें किन धाराओं में गिरफ्तार किया जा रहा है। ‘ग्राउंड ऑफ अरेस्ट’ दस्तावेज में कई खामियां पाई गईं, जिसमें हत्या जैसी गंभीर धारा का भी सही उल्लेख नहीं था। अदालत ने इसे आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण साफ-साफ बताना जरूरी है, क्योंकि यह उसका मूल अधिकार है। इस टिप्पणी ने पुलिस प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
धीमी जांच बनी जमानत की वजह
सोनम रघुवंशी पिछले करीब 10 महीनों से जेल में थीं, लेकिन केस की सुनवाई काफी धीमी रही। चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद अब तक 90 में से केवल 4 गवाहों के बयान ही दर्ज हो पाए हैं। इसके अलावा सप्लीमेंट्री चार्जशीट और नए आरोपियों के जुड़ने से ट्रायल की गति और भी धीमी हो गई। अदालत ने माना कि इस देरी के लिए आरोपी जिम्मेदार नहीं है, इसलिए उसे अनिश्चित समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। वहीं, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए इसे तकनीकी गलती बताया, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कानूनी प्रक्रिया में हुई खामियों को गंभीर माना।
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