प्रयागराज में चल रहे Magh Mela 2026 में इस बार सिर्फ स्नान और धार्मिक कार्यक्रम ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि संतों से जुड़े विवाद भी सुर्खियां बटोर रहे हैं। इन्हीं में से एक नाम है जगद्गुरु महामंडलेश्वर संतोष दास, जिन्हें लोग सतुआ बाबा के नाम से जानते हैं। सतुआ बाबा माघ मेले में अपनी महंगी गाड़ियों और शानदार लाइफस्टाइल को लेकर पहले ही चर्चा में आ चुके थे।
इसी बीच खबर सामने आई है कि पुरी गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने सतुआ बाबा को कड़ी फटकार लगाई है। बताया जा रहा है कि शंकराचार्य ने उनके रहन-सहन और धन-दौलत को लेकर सवाल उठाए और साफ शब्दों में कहा कि जगद्गुरु जैसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को मर्यादा में रहना चाहिए। इस घटना के बाद संत समाज और आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर संतों की सादगी और उनके व्यवहार की सीमा क्या होनी चाहिए।
मुलाकात के दौरान शंकराचार्य ने क्यों लगाई फटकार
सूत्रों के अनुसार, यह मामला 21 जनवरी का है। उस दिन सतुआ बाबा प्रयागराज के एक बड़े अधिकारी के साथ शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के दौरान बातचीत ऐसी दिशा में पहुंच गई, जहां शंकराचार्य ने सतुआ बाबा से सीधे सवाल पूछ लिए।
बताया जा रहा है कि शंकराचार्य ने कहा, “तुम जगद्गुरु होकर भी इधर-उधर दूसरे बाबाओं के पीछे क्यों घूमते रहते हो?” इसके बाद उन्होंने उनकी महंगी गाड़ियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “तुम करोड़ों की गाड़ियों में घूमते हो, इतना पैसा आखिर आता कहां से है?”
शंकराचार्य के ये सवाल सुनकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। यह पहली बार नहीं है जब किसी संत की महंगी लाइफस्टाइल पर सवाल उठे हों, लेकिन शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक पद से ऐसी बात आने के कारण यह मामला और गंभीर हो गया। लोगों का कहना है कि इस फटकार का मकसद किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि संत समाज को मर्यादा की याद दिलाना था।
डांट के बाद दी समझाइश, मर्यादा में रहने की नसीहत
खबरों के मुताबिक, थोड़ी देर बाद शंकराचार्य का रुख थोड़ा नरम हुआ। उन्होंने सतुआ बाबा को समझाते हुए कहा कि जगद्गुरु का पद बहुत जिम्मेदारी वाला होता है और इसके साथ सादगी और संयम जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि संतों की पहचान उनके आचरण, ज्ञान और सेवा से होती है, न कि महंगी गाड़ियों और दिखावे से।
इस पूरे मामले के बाद यह बात भी सामने आई कि सतुआ बाबा पहले ही माघ मेले में लग्जरी कारों को लेकर विवादों में आ चुके थे। जब मामला बढ़ा तो उन्होंने अपने कैंप से महंगी गाड़ियों को हटवा दिया था। कुछ लोग मानते हैं कि यह कदम विवाद शांत करने के लिए उठाया गया, जबकि कुछ का कहना है कि दबाव के कारण ऐसा किया गया।
इस घटना ने आम लोगों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोग सोशल मीडिया पर कह रहे हैं कि संतों को आम जीवन जीना चाहिए ताकि लोग उनसे प्रेरणा ले सकें। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि हर व्यक्ति की अपनी निजी जिंदगी होती है, लेकिन जब बात धर्म और बड़े पद की हो, तो जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से भी जुड़ा माघ मेले का माहौल
Magh Mela 2026 इन दिनों एक और विवाद को लेकर भी चर्चा में है, जो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा है। वसंत पंचमी के दिन भी उन्होंने गंगा स्नान नहीं किया और अपने शिविर के बाहर ही बैठे रहे। उनका कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें भरोसा नहीं देते और जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह अपना विरोध जारी रखेंगे।
इस पूरे मामले पर पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने सीधे तौर पर ज्यादा कुछ नहीं कहा है, लेकिन उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना “लाडला” जरूर बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मामला आधिकारिक रूप से उनके सामने नहीं आता, तब तक वह कोई अंतिम टिप्पणी नहीं करेंगे।
इन सब घटनाओं के बीच सतुआ बाबा से जुड़ा मामला माघ मेले की चर्चा को और गर्म कर रहा है। एक तरफ श्रद्धालु मेले में आस्था की तलाश में आते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे विवाद लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या आज के समय में संतों की भूमिका और जिम्मेदारी बदल रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फटकार के बाद सतुआ बाबा क्या प्रतिक्रिया देते हैं और माघ मेले का माहौल किस दिशा में आगे बढ़ता है।
Read More-झारखंड में CRPF ऑपरेशन: 16 माओवादी ढेर, अमित शाह ने नक्सलवादियों से की ये अपील
