बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन समस्तीपुर जिले से सामने आई यह तस्वीर हर किसी को हैरान करने वाली है। दलसिंहसराय स्थित रामाश्रय बालेश्वर कॉलेज में आयोजित स्नातक सत्र 2025-26 की इंटरनल परीक्षा का जो दृश्य सामने आया है, उसने शिक्षा के पूरे ढांचे पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। 8 जनवरी को आयोजित परीक्षा के अंतिम दिन कॉलेज परिसर में छात्रों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। हालात ऐसे थे कि परीक्षा कक्षों में बैठने की जगह तक नहीं बची। इस अव्यवस्था के बीच परीक्षा हो रही थी, लेकिन पढ़ाई या अनुशासन का नामोनिशान नहीं दिखा। छात्रों के हाथों में कलम से ज्यादा गाइड, नोट्स और मोबाइल नजर आ रहे थे। जिसे जहां जगह मिली, वहीं बैठकर उत्तर लिखे जा रहे थे। इस पूरे माहौल को देखकर यही सवाल उठता है कि अगर परीक्षा का स्तर ऐसा होगा, तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी।
खुलेआम नकल, प्रशासन पूरी तरह खामोश
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नकल किसी डर या छुपाव के साथ नहीं हो रही थी, बल्कि खुलेआम की जा रही थी। परीक्षा हॉल में छात्र-छात्राएं बेखौफ होकर चीट-पुर्जों और मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। किसी को रोकने-टोकने वाला कोई नजर नहीं आया। कॉलेज प्रशासन और परीक्षा से जुड़े जिम्मेदार लोग पूरी तरह मौन बने रहे। किसी छात्र ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्र आराम से किताब और गाइड से उत्तर उतार रहे हैं, जैसे यह कोई सामान्य अभ्यास हो। नकल करने वालों को न तो पकड़े जाने का डर था और न ही किसी कार्रवाई की चिंता। इस दृश्य ने न सिर्फ कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की साख को भी झटका दिया है।
जब बरामदा बना परीक्षा केंद्र
कॉलेज में कमरों की कमी का बहाना बनाकर बरामदों को ही परीक्षा केंद्र में तब्दील कर दिया गया। जहां न सही बैठने की व्यवस्था थी और न ही निगरानी का कोई इंतजाम। बरामदे में बैठे छात्र इधर-उधर घूमते हुए सवाल पूछते और जवाब लिखते नजर आए। शिक्षक और पर्यवेक्षक कहीं नजर नहीं आए, और अगर थे भी तो उनकी मौजूदगी सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रही। वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि परीक्षा के नाम पर सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। यह स्थिति उन छात्रों के लिए भी निराशाजनक है, जो मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मेहनत और नकल के बीच कोई फर्क ही न रह जाए, तो ईमानदार छात्र खुद को ठगा हुआ क्यों न महसूस करें? यह तस्वीर बिहार के उन हजारों छात्रों के लिए तमाचा है, जो सीमित संसाधनों में भी बेहतर भविष्य के सपने देखते हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद एक बार फिर बिहार की शिक्षा व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो गई है। सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और कॉलेज प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा विभाग से भी जवाब मांग रहे हैं। सवाल यह भी है कि अगर इंटरनल परीक्षा का हाल ऐसा है, तो फाइनल परीक्षा में क्या स्थिति होगी? शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान और समझ विकसित करना होता है, लेकिन जब परीक्षा सिर्फ औपचारिकता बन जाए, तो डिग्री का मूल्य भी सवालों के घेरे में आ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। जरूरत है कि शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से ले और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि आने वाले समय में ऐसी तस्वीरें दोबारा देखने को न मिलें। वरना हर बार यही कहा जाएगा—ऐसे पढ़ेंगे तो कैसे बढ़ेंगे?
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