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पति की सजा बेटे को क्यों? अपने ही बच्चे को मां ने दूध पिलाने से किया इनकार, वजह जानकर भावुक हो जाएंगे आप

गोरखपुर जिला महिला अस्पताल में जन्मे नवजात को लेकर मां का दर्द सामने आया। पति के लापता होने और हालात की मजबूरी में मां ने पहले बच्चे को दूध पिलाने से इनकार कर दिया।

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दरभंगा जिले की रहने वाली फरजाना परवीन की जिंदगी उस वक्त अचानक बदल गई, जब वह ट्रेन से दरभंगा से दिल्ली जा रही थी। सफर के दौरान गोरखपुर पहुंचते ही उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने तुरंत इसकी सूचना जीआरपी को दी। हालात को देखते हुए जीआरपी कर्मियों ने बिना देर किए मानवता दिखाते हुए महिला को गोरखपुर जिला महिला अस्पताल पहुंचाया। रात करीब 11 बजे फरजाना ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के साथ ही खुशियों की जगह चिंता ने घेर लिया। नवजात की हालत बेहद नाजुक थी, उसकी सांस और हार्टबीट सामान्य नहीं थी। डॉक्टरों ने तत्काल बच्चे को गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती किया और उसकी जान बचाने के लिए इलाज शुरू किया। अस्पताल में मौजूद हर कोई इस नवजात की सलामती के लिए प्रयासरत था, लेकिन मां के चेहरे पर खुशी के बजाय डर और असहायता साफ झलक रही थी।

नवजात की हालत नाजुक, मां ने दूध पिलाने से किया इनकार

जन्म के बाद जब डॉक्टरों ने मां से नवजात को दूध पिलाने के लिए कहा तो फरजाना ने साफ इनकार कर दिया। अस्पताल कर्मी और डॉक्टर इस बात से हैरान रह गए। आमतौर पर मां और बच्चे के बीच का पहला रिश्ता दूध से जुड़ता है, लेकिन यहां मां खुद इस जिम्मेदारी से पीछे हटती नजर आई। पूछने पर उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, बस इतना कहा कि वह इस बच्चे को नहीं पाल सकती। पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती फरजाना और उसका बच्चा इलाज के दौरान चर्चा का विषय बन गए। डॉक्टरों ने समझाया कि मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी है और इससे उसकी जान बच सकती है। कई बार समझाने के बाद आखिरकार मां ने बच्चे को दूध पिलाने के लिए हामी भरी। हालांकि उस दौरान भी उसके चेहरे पर मजबूरी और चिंता साफ दिखाई दे रही थी, जैसे वह किसी भारी बोझ के नीचे दबी हो।

पति लापता, माता-पिता भी नहीं रहे… संघर्षों में घिरी फरजाना

जब अस्पताल कर्मियों ने फरजाना से उसकी हालत के बारे में विस्तार से बात की, तो उसकी निजी जिंदगी का दर्दनाक सच सामने आया। फरजाना ने बताया कि उसके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है और दुनिया में उसका कोई सहारा नहीं है। शादी के महज एक साल के भीतर ही उसका पति किसी दूसरी महिला के चक्कर में पड़कर छह महीने पहले लापता हो गया। तब से न कोई खबर है और न ही कोई मदद। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान उसने अकेले ही हर दर्द सहा। फरजाना का कहना है कि उसके पास न पैसे हैं, न घर और न ही कोई ऐसा व्यक्ति जो उसका और बच्चे का जिम्मा उठा सके। इसी मजबूरी ने उसे बच्चे को अपनाने से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उसका सवाल था कि जब पति की गलती है, तो उसकी सजा इस मासूम बच्चे को क्यों मिले, लेकिन हालात ऐसे हैं कि वह खुद को भी संभाल नहीं पा रही।

डॉक्टरों की पहल और मां का बदला फैसला

महिला अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने फरजाना को लगातार समझाया कि बच्चा पूरी तरह निर्दोष है और उसे मां के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अस्पताल प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की मदद से आगे का रास्ता निकाला जा सकता है। काफी बातचीत और भावनात्मक समझाइश के बाद फरजाना का दिल पसीजा और उसने अपने नवजात को दूध पिलाना शुरू किया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, हालांकि वह अभी भी निगरानी में है। यह मामला सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है कि टूटते रिश्तों और लापरवाही की सबसे बड़ी कीमत मासूम बच्चों और मजबूर महिलाओं को क्यों चुकानी पड़ती है। अस्पताल में मौजूद लोग आज भी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि फरजाना जैसी महिलाओं के लिए समाज और सिस्टम को मिलकर स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।

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