राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। दिल्ली में 10 जनवरी को आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन समारोह में अजित डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत का इतिहास केवल गौरव की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, अपमान और बलिदान से भरा रहा है। उन्होंने कहा कि यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि हर युवा के भीतर आग होनी चाहिए। डोभाल के मुताबिक, ‘बदला’ शब्द भले ही आदर्श न हो, लेकिन यह एक शक्तिशाली ताकत है और भारत को अपने इतिहास का बदला लेकर फिर से महान बनना होगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
ओवैसी का सवाल- बदला लेना है तो किससे लेंगे?
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अजित डोभाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर इतिहास का बदला लेना ही है तो अंग्रेजों और हूणों से लिया जाए। ओवैसी ने सवाल उठाया कि जिन्होंने भारत को लंबे समय तक लूटा, लाखों लोगों को भूख से मरने पर मजबूर किया और सभ्यताओं को नुकसान पहुंचाया, उनसे बदला कौन लेगा? उन्होंने कहा कि हूण सेंट्रल एशिया और चीन की ओर से आए थे, जिन्होंने गुप्त साम्राज्य को कमजोर किया। क्या उनसे बदला लिया जाएगा? ओवैसी ने यह भी कहा कि इन घटनाओं के समय मुसलमान भारत में आए भी नहीं थे, फिर आज किससे बदले की बात की जा रही है।
इतिहास के पन्ने खोलते हुए
ओवैसी ने अपने बयान में भारतीय इतिहास के कई प्रसंगों का जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि पुष्यमित्र शुंग के समय जो कुछ हुआ, उसका बदला कौन लेगा? उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ओडिशा का सबसे बड़ा मंदिर कभी बौद्ध समाज का था। ओवैसी ने सवाल किया कि अगर इतिहास का हिसाब बराबर करने की बात है तो उन घटनाओं का क्या होगा? उन्होंने यह भी कहा कि अगर बदले की राजनीति शुरू होगी, तो देश को आगे बढ़ाने की जगह समाज को पीछे ले जाया जाएगा। ओवैसी के अनुसार, इतिहास से सबक लेना जरूरी है, लेकिन बदले की भावना से देश का भविष्य तय नहीं किया जा सकता।
अजित डोभाल का तर्क
अजित डोभाल ने अपने भाषण में यह भी कहा था कि भारत एक समय बेहद विकसित सभ्यता था। उन्होंने दावा किया कि भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया, न ही किसी के मंदिर तोड़े या लूटपाट की, जबकि दुनिया के कई हिस्से उस समय पिछड़े हुए थे। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि भारत ने अपनी सुरक्षा से जुड़े खतरों को समय पर नहीं समझा। डोभाल के मुताबिक, हमारे गांव जलाए गए, सभ्यता को नुकसान पहुंचाया गया और हम मूक दर्शक बने रहे। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि क्या हमने इतिहास से सबक सीखा है और क्या आने वाली पीढ़ियां इसे याद रखेंगी? उनका कहना था कि अगर इतिहास को भुला दिया गया, तो यह देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।
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