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नीले ड्रम हत्याकांड में बड़ा और सनसनीखेज मोड़: फांसी के फंदे से बचने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे मुस्कान-साहिल, क्या पलटेगा फैसला?

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा पाने वाली मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है।

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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर को दहला देने वाले अत्यंत चर्चित ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ में एक बार फिर से बड़ा और सनसनीखेज मोड़ आ चुका है। इस खौफनाक मामले में जिला अदालत द्वारा फांसी की सजा पाए दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने अब न्याय की आस में सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने मिलकर मेरठ की निचली अदालत के उस कड़े और ऐतिहासिक फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। इस ताजा कानूनी कदम के बाद एक बार फिर से इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दोनों दोषियों की यह पूरी कोशिश है कि हाईकोर्ट इस गंभीर मामले में उनके खिलाफ सुनाए गए फांसी के फरमान को या तो पूरी तरह से रद्द कर दे या फिर उनके पक्ष में कोई राहत भरी राहत दे।

मर्चेंट नेवी कर्मी की खौफनाक हत्या: आखिर क्या था नीले ड्रम हत्याकांड का पूरा सच?

यह पूरा मामला किसी फिल्मी कहानी से भी ज्यादा भयावह और रोंगटे खड़े करने वाला है, जिसने एक मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की जिंदगी को बेरहमी से हमेशा के लिए छीन लिया था। मार्च 2025 में सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी, जिसके खुलासे ने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया था। इस जघन्य हत्याकांड में किसी और का नहीं, बल्कि खुद सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके कथित करीबी सहयोगी साहिल शुक्ला का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया था। जब पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले की तह तक जाकर परतें उधेड़नी शुरू कीं, तो एक के बाद एक ऐसे खौफनाक खुलासे हुए जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। पुलिस की शुरुआती और वैज्ञानिक जांच में यह साबित हुआ था कि किस तरह बेहद शातिर तरीके से इस पूरी योजना को अंजाम दिया गया था।

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13 महीने की लंबी सुनवाई और 22 गवाह: कैसे शिकंजे में फंसे थे दोनों आरोपी?

मेरठ की जिला अदालत में इस बहुचर्चित मामले की कानूनी सुनवाई किसी लंबी मैराथन की तरह लगभग 13 महीने तक लगातार चली। इस लंबी समयावधि के दौरान अदालत में कुल 126 बार सुनवाई की गई, जो इस केस की बेहद संवेदनशीलता और जटिलता को साफ दर्शाती है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले को साबित करने के लिए अदालत में कुल 22 मजबूत गवाह पेश किए गए। इन गवाहों में वे लोग भी विशेष रूप से शामिल थे जिनसे आरोपियों ने वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू, नीले ड्रम और अन्य सामान खरीदा था। इसके अलावा, मामले की कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए होटल प्रबंधकों और कैब ड्राइवरों के बयान भी अहम सबूत के रूप में दर्ज किए गए थे। इन तमाम पुख्ता गवाहियों और अकाट्य साक्ष्यों के आधार पर 30 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया और अंततः 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुना दी।

अब आगे क्या? इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी देश भर की निगाहें

मेरठ की जिला अदालत के इस कड़े फैसले के खिलाफ अब मुस्कान और साहिल ने हाईकोर्ट में जो अपील दायर की है, उसमें केवल फांसी की सजा को ही नहीं, बल्कि उनके दोषी ठहराए जाने के पूरे फैसले को ही चुनौती दी गई है। उनका यह कदम यह साफ बयां करता है कि वे अपने ऊपर लगे इन गंभीर और जानलेवा आरोपों को सिरे से खारिज करवाना चाहते हैं। आने वाले दिनों में इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस अपील पर आगे की नियमित सुनवाई की जाएगी। अदालत के भीतर दोनों पक्षों की ओर से जोरदार दलीलें और सबूतों की गहराई से समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि निचली अदालत के इस फैसले में कोई बदलाव आता है या नहीं। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं कि न्यायपालिका इस मामले में क्या अंतिम और निर्णायक फैसला सुनाती है।

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